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नई दिल्ली: देश में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने और प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए ‘संसद वाणी’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कानून बनाने की पुरज़ोर मांग की है। इस मांग के केंद्र में सीधे तौर पर उन अधिकारियों को रखा गया है जो अपनी कुर्सी पर बैठकर जनता के कामों को लटकाते हैं और समय पर कार्रवाई नहीं करते।
लापरवाही पर सीधे निलंबन: बदलेगी देश की तस्वीर
‘संसद वाणी’ का मानना है कि देश से भ्रष्टाचार को मिटाने का सबसे अचूक नुस्खा यही है कि अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि केंद्र सरकार एक ऐसा सख्त कानून लेकर आती है, जिसके तहत “शिकायत या मामले पर समय सीमा के भीतर कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों को सीधे निलंबित (Suspend) कर दिया जाए”, तो प्रशासनिक व्यवस्था में रातों-रात बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
“अगर ऐसा सख्त कानून अमल में आ गया, तो यकीन मानिए देश से 99% भ्रष्टाचार अपने आप खत्म हो जाएगा। जब अधिकारियों के सिर पर निलंबन की तलवार लटकेगी, तो वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समयबद्ध तरीके से करने पर मजबूर होंगे।”
— संसद वाणी
जनता की परेशानी और अफसरों की मनमानी पर लगेगा लगाम
अक्सर देखा जाता है कि आम जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक जाती है, लेकिन कई लापरवाह अधिकारी फाइलों को दबाकर बैठे रहते हैं। यही ढिलाई आगे चलकर भ्रष्टाचार का रूप ले लेती है। ‘संसद वाणी’ द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम और कानून की मांग को यदि अमली जामा पहनाया जाता है, तो यह देश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ साबित हो सकता है।
अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ‘संसद वाणी’ के इस बेहद कड़े और सुधारात्मक सुझाव पर क्या बड़ा फैसला लेते हैं।