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म्हाडा अधिकारियों की तानाशाही! ‘संसद वाणी’ के सबूतों और कोर्ट की याचिका के बाद भी रोहित शिंदे और संतोष कांबले की कुंभकर्णी नींद, मालवणी में मंडरा रहा है बड़ा खतरा

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मुंबई, मालवणी (समाना नगर): भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ‘संसद वाणी’ की मुहिम लगातार जारी है। मालवणी, समाना नगर, गेट नंबर 8 पर म्हाडा (MHADA) के आपातकालीन (Emergency) रास्ते को पूरी तरह लॉक करके उसे अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। लेकिन म्हाडा के मलाईदार पदों पर बैठे अधिकारियों को न तो जनता की जान की परवाह है और न ही माननीय कोर्ट के आदेशों का डर।


‘लेटर जारी करेंगे’… कहकर 2 महीने से गायब हैं म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे

स्थानीय निवासियों ने अपनी सुरक्षा को खतरे में देख, इस अवैध पार्किंग के पुख्ता वीडियो और फोटो के सबूत ‘सांसद वाणी’ की टीम को सौंपे थे। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए वशिष्ठ मीडिया हाउस के निदेशक और ‘संसद वाणी’ के ओनर/पब्लिशर अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने ये सारे सबूत सीधे म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे को भेजे थे।

  • कागजी दिलासा: सबूत देखकर अधिकारी रोहित शिंदे ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि वे इस पर तुरंत एक्शन लेंगे और जल्द ही कार्रवाई का पत्र (Letter) जारी करेंगे।
  • ज़मीनी हकीकत: इस बात को 2 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन रोहित शिंदे की कलम से आज तक वो पत्र नहीं निकला। साफ है कि आश्वासन सिर्फ मामला रफा-दफा करने का एक बहाना था।

‘कुर्सी तोड़’ सीनियर अधिकारी संतोष कांबले का अहंकार: “मीडिया के बोलने से कुछ नहीं करूंगा”

जब रोहित शिंदे की ढिलाई के बाद इस गंभीर मुद्दे को लेकर उनके सीनियर अधिकारी संतोष कांबले से संपर्क किया गया, तो उनका रवैया किसी तानाशाह से कम नहीं था। मुंबई में शायद ही कोई ऐसा गैर-जिम्मेदार अधिकारी होगा, जो अपनी मखमली कुर्सी छोड़कर ग्राउंड जीरो (मालवणी) की जांच करने तक की जहमत नहीं उठाता।

जब मीडिया ने जनता की शिकायत उनके सामने रखी, तो कार्रवाई करने के बजाय संतोष कांबले बदतमीजी पर उतर आए और अहंकार में चूर होकर जवाब दिया:

“मीडिया के बोलने से मैं कुछ नहीं करूंगा!”

जनता का सुलगता सवाल: अगर मुंबई में म्हाडा के इतने बड़े अधिकारी मीडिया की बात सुनकर कार्रवाई करने के बजाय बदतमीजी करेंगे, तो फिर झुग्गियों और चालों में रहने वाली आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा? क्या कांबले साहब केवल दफ्तर में बैठकर समय काटने की पगार लेते हैं?


कोर्ट की याचिका को भी ठेंगा! आखिर किसका संरक्षण है इन अधिकारियों को?

म्हाडा प्रशासन और इन अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और अड़ियल रुख को देखते हुए वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस पूरे अवैध कब्जे और जनता की सुरक्षा के मामले को लेकर माननीय कोर्ट में याचिका (Petition) दाखिल कर दी है

बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक बात यह है कि मामला कोर्ट की दहलीज पर पहुंचने के बाद भी अधिकारी रोहित शिंदे और संतोष कांबले के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आपातकालीन रास्ता आज भी पूरी तरह से लॉक है। आखिर इन अधिकारियों को किसका वरदहस्त प्राप्त है, जो ये कोर्ट की कार्यवाही से भी बेखौफ हैं?


‘संसद वाणी’ की चेतावनी: कोई हादसा हुआ, तो जिम्मेदार होंगे शिंदे और कांबले!

मालवणी समाना नगर गेट नंबर 8 का यह रास्ता कोई साधारण सड़क नहीं, बल्कि आपातकालीन स्थिति के लिए आरक्षित Emergency Exit है। कल को अगर इस घनी आबादी वाले इलाके में कोई बड़ी दुर्घटना, आगजनी या मेडिकल इमरजेंसी होती है, तो इस लॉक रास्ते और अवैध पार्किंग के कारण एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ियां अंदर नहीं घुस पाएंगी।

सीधा सवाल: यदि इस लापरवाही की वजह से किसी निर्दोष की जान जाती है, तो क्या म्हाडा अधिकारी संतोष कांबले और रोहित शिंदे पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए?

‘संसद वाणी’ म्हाडा के इन अधिकारियों के अहंकार और इस अवैध साम्राज्य के खिलाफ तब तक अपनी आवाज बुलंद रखेगा, जब तक कि मालवणी की जनता को उनका सुरक्षित रास्ता वापस नहीं मिल जाता।

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