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नेपाल की राजनीति में बड़ा उथल-पुथल मच गया है। नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के शपथग्रहण के महज 24 घंटे बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया।
जेन-जेड प्रदर्शनों का काला अध्याय
सितंबर 2025 में नेपाल में जेन-जेड (Gen-Z) युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसमें भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ गुस्सा फूटा। दो दिनों में 76 निहत्थे छात्रों की मौत हो गई, जब प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।
उच्चस्तरीय जांच आयोग ने रिपोर्ट में ओली सरकार की लापरवाही और प्रशासनिक नाकामी को मुख्य कारण बताया, जिसमें गोली चलाने के आदेश देने वालों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई।
नई सरकार का सख्त रुख
बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने शपथ लेते ही कैबिनेट बैठक में फैसला लिया और ओली को उनके भक्तपुर निवास से, जबकि लेखक को पहले गिरफ्तार किया गया।
गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने कहा, “कानून से ऊपर कोई नहीं है, यह न्याय की शुरुआत है।” यह कदम जवाबदेही सुनिश्चित करने का बड़ा संदेश है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
यह गिरफ्तारी नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद की पहली बड़ी कार्रवाई है, जो जेन-जेड आंदोलन से उपजी अस्थिरता को दर्शाती है। आयोग ने चेतावनी दी कि सिफारिशें न मानने पर फिर बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं।
ओली का चीन-समर्थन रहा है, इसलिए यह घटना क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।