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Why BJP Lost Ayodhya: बीजेपी के शासनकाल में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ इसके बावजूद पार्टी को यहां से करारी हार का सामना करना पड़ा. सपा के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को हराकर जीत दर्ज की. बीजेपी के हार के की कारण हैं.
लोकसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. असल परिणाम एग्जिट पोल से बिल्कुल अलग हैं. बीजेपी बहुमत के आंकड़े को पार नहीं कर पाई. उत्तर प्रदेश में उसे बड़ा नुकसान हुआ है. यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 33 सीटें ही मिली हैं. इस बार यूपी में सपा का जादू चला. अखिलेश यादव ने ऐसी बिसात बिछाई की बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी. यहां तक कि अयोध्या की सीट भी बीजेपी को गंवानी पड़ी. बीजेपी के फैजाबाद लोकसभा सीट हारने के बाद अयोध्या की खूब चर्चा हो रही है. सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर जिस अयोध्या में बीजेपी ने राम मंदिर बनाया वहीं से कैसे चुनाव हार गई. राजनीतिक विश्लेषकों और अयोध्यावासियों का इस पर कहना है कि दलित मतों के ध्रुवीकरण के चलते बीजेपी को अपनी सीट गंवानी पड़ी.
फैजाबाद सीट से तीन बार सांसद रहे लल्लू सिंह को अवधेश प्रसाद ने मात दे दी. अवधेश प्रसाद ने 54567 मतों के अंतर से लल्लू सिंह को हराया. ये हार बीजेपी को चुभ रही है. सामान्य सीट होने के बावजूद अखिलेश ने यहां से अवधेश पासी को मैदान में उतारा.
“राम मंदिर तो ठीक लेकिन…”
अयोध्या के साकेत महाविद्यालय के शिक्षक जन्मेजय तिवारी ने अयोध्या में बीजेपी की हार पर कहा कि यहां की जनता बदलाव चाहती थी इसलिए बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. राम मंदिर तो ठीक था लेकिन आपको और भी चीजें देखनी चाहिए थी.
बूथ मैनेजमेंट में फेल रही बीजेपी
अयोध्या के व्यापारी पंकज गुप्ता ने कहा कि बूथ मैनेजमेंट में बीजेपी ने उतनी तत्परता नहीं नहीं दिखाई जितनी इंडिया गठबंधन ने दिखाई. वोटरों तक मतदान पर्ची ही नहीं पहुंच सकी. दलित, मुस्लिम और यादवों का समीकरण बीजेपी की हार का कारण बना.
“मथुरा न अबकी बार काशी बार अवधेश पासी”
अयोध्या में भाजपा ने शहर में ज्यादा फोकस किया. उसने गांव में उस हिसाब से प्रचार प्रसार नहीं किया जिस तरह से इंडिया गठबंधन ने किया. अवधेश प्रसाद ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत किया. उनके समर्थकों ने एक नारा दिया था. वो नारा था “मथुरा न अबकी बार काशी बार अवधेश पासी”.इस नारे ने दलितों के मन में अंतर पैदा किया.
जातीय समीकरण और आरक्षण ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल
यहां से दलित उम्मीदवार उतार कर अखिलेश यादव ने बड़ा प्रयोग किया था. उनका प्रयोग सफल रहा. फैजाबाद के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा दलितों की आबादी है. दलित 26 फीसदी, मुस्लिम 14 फीसदी, ब्राह्मण और यादव 12-12 फीसदी है. फैजाबाद में सबसे ज्यादा दलित बिरादरी का होना भी कहीं न कहीं सपा के जीत का सबसे बड़ा कारण रहा है.
आरक्षण के मुद्दे को लेकर दलितों में एक लग भय था. आरक्षण कहीं खत्म न हो जाए इसके भय से दलित, ओबीसी समेत अन्य पिछड़ा वर्ग एक साथ गोलबंद होकर इंडिया गठबंधन की ओर गया.
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