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मुंबई: मुंबई की बारिश और बदहाल सड़कों के बीच मानवीय संवेदनशीलता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासन की लापरवाही को और भी गहरा कर देती है। विशाल नगर, मिठचौकी में सड़क पर बने एक खतरनाक खुले गड्ढे ने राहगीरों के लिए मौत का जाल बिछा रखा था, जहाँ लगातार बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे थे।
ऐसे में, मौके पर मौजूद RTO वॉर्डन के कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर एक मिसाल पेश की। बीएमसी (BMC) के भरोसे बैठने के बजाय, इन वॉर्डन्स ने खुद सीमेंट के ढक्कन से उस जानलेवा गड्ढे को ढकने का सराहनीय कार्य किया। यह उनकी सतर्कता और तत्परता ही थी, जिसके कारण आज शायद किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सका।
लेकिन इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि आखिर बीएमसी कहाँ है? जिस सड़क की मरम्मत और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की है, वहां दूसरे विभाग के कर्मचारी आकर बीएमसी का काम क्यों कर रहे हैं? क्या मुंबई की जनता को सुरक्षित सड़कें मुहैया कराना अब बीएमसी की प्राथमिकता सूची में ही नहीं है?
RTO वॉर्डन की इस तत्परता ने न केवल अपनी ड्यूटी के प्रति उनके समर्पण को साबित किया है, बल्कि बीएमसी की ‘मानसून-पूर्व तैयारियों’ की कलई भी खोल दी है। जनता अब पूछ रही है कि जब दूसरे विभाग अपनी जिम्मेदारी समझ सकते हैं, तो बीएमसी का अमला केवल कागजों पर ही क्यों काम करता है?
वशिष्ठ वाणी इस नेक काम के लिए RTO वॉर्डन के इन जांबाज कर्मचारियों को सलाम करती है और प्रशासन से यह मांग करती है कि इस तरह की ‘जुगाड़’ वाली मरम्मत के बजाय, शहर की सड़कों का स्थायी और सुरक्षित निर्माण सुनिश्चित किया जाए।