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ब्यूरो, मुंबई (संसद वाणी): आगामी त्योहारों और आस्था की आड़ में मुंबई के फुटपाथों और सार्वजनिक सड़कों को बंधक बनाने का खेल अब प्रशासनिक शह पर खुलेआम शुरू हो चुका है। ‘संसद वाणी’ द्वारा लगातार आगाह किए जाने के बावजूद, मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आला अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं। ताज़ा और सबसे खौफनाक मामला मालाड (पश्चिम) के मार्वे रोड, मालवणी नंबर 1 का है, जहाँ फुटपाथ को पूरी तरह ब्लॉक कर मंडप खड़े कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय राहगीर, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान हथेली पर रखकर मुख्य सड़क पर चलने के लिए मजबूर हैं।
‘संसद वाणी’ की समय रहते दी गई लीगल नोटिस को बीएमसी ने किया अनसुना!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू बीएमसी की लापरवाही का है। जब ‘संसद वाणी’ ने इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई थी, तब धरातल पर निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ था। बीएमसी कमिश्नर कार्यालय और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि चाहते, तो उसी वक्त आयोजकों को सख्त चेतावनी जारी कर सकते थे कि वे बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करें और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ पर कम से कम ५०% जगह छोड़कर ही मंडप का निर्माण करें। लेकिन नियमों का डंडा चलाने के बजाय प्रशासन ने आँखें मूँद लीं, जिसका नतीजा आज मार्वे रोड की सड़कों पर दिख रहा है।
कुर्सी और मलाई के आगे दम तोड़ती प्रशासनिक जवाबदेही!
मालवणी की ज़मीनी तस्वीरें साफ गवाही दे रही हैं कि मुंबई का अफ़सरशाही तंत्र जनता की सुरक्षा को लेकर कितना संवेदनहीन हो चुका है। आम जनता आज यह तीखा सवाल पूछ रही है कि क्या वातानुकूलित (AC) दफ्तरों में बैठी अफ़सरशाही सिर्फ और सिर्फ रसूखदारों के आगे नतमस्तक होने के लिए है? आखिर कौन सा ‘अदृश्य लाभ’ या प्रशासनिक दबाव है जो इन अधिकारियों को देश की सर्वोच्च अदालतों के उन आदेशों को लागू करने से रोक रहा है, जिसमें फुटपाथ पर ‘चलने के अधिकार’ को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) का हिस्सा माना गया है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगी बीएमसी?
मार्वे रोड एक व्यस्त मार्ग है, जहाँ चौबीसों घंटे भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। फुटपाथ पूरी तरह ब्लॉक होने के कारण जब लोग गाड़ियों के बीच से गुजरते हैं, तो किसी भी वक्त कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्या बीएमसी प्रशासन और स्थानीय पुलिस केवल किसी बड़ी तबाही या किसी मासूम की जान जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि बाद में कागज़ी कार्रवाई का ढोंग रचा जा सके?
‘संसद वाणी’ इस प्रशासनिक ढिठाई और जनता के जीवन से खिलवाड़ के खिलाफ अपनी मुहिम को देश के शीर्ष स्तर तक ले जाएगी। मालवणी नंबर 1 के इन पुख्ता वीडियो और तस्वीरों को आधार बनाकर हमारी लीगल टीम कोर्ट की अवमानना के तहत संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करवाने के लिए कानूनी कदम उठाने जा रही है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट पूर्णतः सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात सुगमता और माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। ‘संसद वाणी’ का उद्देश्य किसी पद की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि जनहित में कानून व्यवस्था बहाल करना है।