Connect with us

मुम्बई

‘शारीरिक चोट नहीं इसका ये अर्थ नहीं कि नहीं हुआ रेप ‘- बॉम्बे हाई 

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को जमानत नहीं दी. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं इसका ये मतलब नहीं कि उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ. हम आरोपी को क्लीन चीट नहीं दे सकते. 17 साल की लड़की द्वारा पूरी घटना बताने के बाद आरोपी को 17 अप्रैल, 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बलात्कार के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया. 17 वर्षीय लड़की से बलात्कार के आरोपी को कोर्ट ने क्लीन चीट नहीं दी.  बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि उसे सिर्फ इसलिए क्लीन चिट नहीं दी जा सकती क्योंकि लड़की के शरीर पर कोई चोट नहीं थी. न्यायमूर्ति मनीष पिताले ने 11 जून के आदेश में कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि मेडिकल जांच रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर किसी चोट का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता निर्दोष है. मेडिकल रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

एफआईआर में कहा गया है कि लड़की किसी कारण से घर से चली गई थी. उस व्यक्ति ने उसे रोते हुए पाया और उसे अपने साथ चलने के लिए राजी किया. उसे एक होटल में ले गया और उसके साथ जबरदस्ती की. अगले दिन, उसने उसके पिता को फोन किया और उसे अपना लोकेशन बताया. लड़की द्वारा पूरी घटना बताने के बाद आरोपी को 17 अप्रैल, 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया.

शारीरिक चोट या जबरन संबंध के कोई निशान नहीं मिले

आरोपी के वकील ने कहा कि आरोप सही नहीं लगते क्योंकि उसने खुद लड़की के पिता को फोन करके उसके बारे में जानकारी दी थी. वकील ने कहा कि अगर उसने वास्तव में कथित कृत्य किया था, तो उसके पिता से संपर्क करना उसके लिए अस्वाभाविक था. साथ ही, मेडिकल रिपोर्ट में लड़की द्वारा दावा किए गए शारीरिक चोट या जबरन संबंध के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

शारीरिक चोट नहीं इसका ये मतलब नहीं कि रेप नहीं हुआ 

इसपर जज ने कहा कि लड़की के बयान से पता चलता है कि जब वह अपने घर से दूर एक जगह पर अकेली थी और मानसिक रूप से परेशान थी. उस व्यक्ति ने उससे संपर्क किया. जब वह उसके साथ उसके वाहन में बैठी, तो उसने उसे पीने के लिए पानी दिया और उसके बाद वह सो गई. उसने “पर्याप्त विवरण” में बताया कि उसने क्या किया. 

उन्होंने कहा कि यह उस व्यक्ति का मामला नहीं है कि वह उसे जानता था या उनके बीच कोई रिश्ता था, जिससे यह संकेत मिलता हो कि यह सहमति से संबंध की पृष्ठभूमि हो सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जहां आवेदक जैसे विवाहित व्यक्ति द्वारा अकेली लड़की का फायदा उठाया जाता है, शारीरिक चोटों की अनुपस्थिति प्रासंगिक नहीं हो सकती है. जमानत याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति पिटाले ने कहा कि आरोप गंभीर हैं.

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.