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उत्तर प्रदेश

आखिर UP में क्यों नहीं चला BJP का जादू? नेताओं ने खुद ही बताई वजह

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लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में बड़ा झटका लगा था. बीजेपी को लग रहा था कि वह यूपी में 2019 जैसा प्रदर्शन करेगी लेकिन नतीजा उसके विपरीत रहा. 2019 में यूपी में 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2024 के आम चुनाव में 33 सीटों पर ही सिमट गई. बीजेपी अयोध्या की भी सीट नहीं बचा पाई. फैजाबाद सीट गंवाने के बाद इसकी चर्चा वैश्विक स्तर पर भी हुई थी. विदेश के कई प्रमुख समाचार पत्रों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था.

लोकसभा चुनाव 2024 में 400 के पार का नारा देने वाली बीजेपी मात्र 240 सीटों पर सिमट गई थी. पूरे एनडीए गठबंधन को 293 सीटें मिली थी. इस चुनाव में यूपी से बीजेपी को बहुत उम्मीद थी लेकिन सबसे बड़ा घाव उसे यहीं से लगा. अयोध्या में राम मंदिर बना लेकिन बीजेपी फैजाबाद लोकसभा सीट हार गई. यह हार देश ही नहीं विदेशी मीडिया में भी चर्चा का विषय रही है. यूपी में बीजेपी को 80 में से मात्र 33 सीटें मिली. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में 62 सीटों पर जीत मिली थी. लेकिन इस बार बाजी पलट गई. यूपी में बीजेपी का सिक्का क्यों नहीं चला? सिर्फ 33 सीटें ही क्यों मिली? इस सवाल का जवाब खुद बीजेपी के नेताओं ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को बताया है.

दिल्ली से बीएल संतोष को उत्तर प्रदेश में खराब प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए भेजा गया था. लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी क्यों फेल हो गई इस बैठक में उसके नेताओं ने कई कारण बता दिए.

  • ‘हमें नहीं मोदी जी को वोट दिया…’  

इस बैठक में पता चला कि बीजेपी के एक सांसद का एक गांव वालों ने विरोध किया तो सांसद साहब ने ताव में आकर कह दिया कि हमें तुम लोगों का वोट नहीं चाहिए. फिर क्या था लोगों ने आईना दिखा दिया. जिन सांसदों को 2024 के आम चुनाव में हार मिली है उनका ट्रैक रिकॉर्ड उम्मीद के मुताबिक नहीं था. जनता जब उनके पास अपनी समस्या लेकर जाती तो वो कहते तुमने हमको नहीं मोदी जी को वोट दिया है.

  • कार्यकर्ताओं का किया तिरस्कार 

बीजेपी के लिए ये कारण यूपी में हार की सबसे बड़ी वजह बने हैं. केंद्रीय नेतृत्व की इस समीक्षा बैठक में बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्षों को पहली बार बुलाया था. समीक्षा के दौरान हार के पीछे की सबसे बड़ी वजह पार्टी कार्यकर्ताओं का तिरस्कार करना भी निकलकर सामने आई है.

इस बैठक में एक क्षेत्रीय अध्यक्ष भी शामिल हुए. उन्होंने बताया  कि बीजेपी के उम्मीदवार जानबूझकर जिला संगठन मंत्रियों और नेताओं के नाम नहीं लेते थे. उन्होंने बताया कि उम्मीदवार कभी समय से कार्यक्रम में नहीं पहुंचे. उम्मीदवार को अगर सुबह 8 से 9 बजे बुलाया जाता तो वह 11 बजे तक पहुंचते थे. इन सबका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

  • क्षेत्रीय नेताओं ने टिकट बंटवारे पर क्या कहा?

इस समीक्षा बैठक में कई क्षेत्रीय नेताओं ने टिकट बंटवारे पर भी सवाल उठाए. बैठक में ये बातें निकलकर सामने आई की इतने सारे सर्वे और संगठन के फीडबैक के बाद भी शीर्ष नेतृत्व ने गलत लोगों को टिकट दिया, जिससे जनता नाराज थी उनको टिकट दिया गया.

  • नारे का कैसा पड़ा असर?

बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष क्षेत्रीय नेताओं की सुनते रहें. उन्होंने किसी को रोका-टोका नहीं. वह सब की सुनते रहें. बैठक में ये बातें भी निकलकर सामने आईं कि पार्टी के कुछ लोग उम्मीदवार के खिलाफ काम कर रहे थे.

बीजेपी के 400 पार नारे को लेकर नेताओं ने कहा कि यह नारा उल्टा हमी पर भारी पड़ गया. विपक्ष ने इस नारे को लेकर कहा कि बीजेपी संविधान बदलना चाहती है. लोग बात कर रहे थे कि कहीं बीजेपी के आने पर आरक्षण खत्म न हो जाए. ऐसे में ये नारा हमारे लिए ही घातक साबित हुआ.          

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