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प्रशासनिक अंधापन या मिलीभगत? कंदिवली में ‘भारत गैस’ के मौत के वाहनों का कब्जा बरकरार, ट्रैफिक अधिकारी सतीश राउत की चुप्पी पर उठे सवाल!

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मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): महानगर में जब कोई बड़ा हादसा होता है, तो मुंबई पुलिस, आरटीओ (RTO) और स्थानीय प्रशासन जांच के लंबे-चौड़े दावे करने मैदान में उतर आते हैं। लेकिन हादसे से पहले दी जा रही चेतावनियों को किस तरह कचरे के डिब्बे में डाल दिया जाता है, इसका ज्वलंत उदाहरण कंदिवली वेस्ट का एकता नगर रोड है। ‘संसद वाणी’ द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद, इस मार्ग पर भारत गैस से भरे खतरनाक वाहनों का अवैध रूप से खड़े रहना बदस्तूर जारी है। जनता की सुरक्षा दांव पर है, लेकिन कंदिवली ट्रैफिक विभाग के अधिकारी सतीश राउत और आरटीओ के वरिष्ठ अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

एकता नगर रोड पर गैस सिलेंडरों से भरे ये वाहन न सिर्फ यातायात को बाधित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए एक ‘टाइम बम’ की तरह साबित हो सकते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। क्या मुंबई आरटीओ और ट्रैफिक विभाग ने यह ठान लिया है कि मीडिया में चाहे जो भी खबरें छपें, वे अपनी मर्जी से ही काम करेंगे और रसूखदारों को संरक्षण देते रहेंगे? जनता अब सीधे तौर पर पूछ रही है कि अधिकारी सतीश राउत और उनके विभाग पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जनता बेबस: नेता मौन, कोर्ट की लंबी प्रक्रिया से कतरा रहे लोग

इस पूरे मामले ने हमारे सिस्टम की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है जहां आम आदमी खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है। स्थानीय नेताओं के पास इस मुद्दे को सुनने का वक्त नहीं है। वहीं, न्याय के लिए अदालत का रुख करना भी अब मजाक बनकर रह गया है। जनता का मानना है कि जब तक कोर्ट का कोई फैसला आएगा, तब तक लापरवाही बरतने वाले इन भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों को ‘प्रमोशन पर प्रमोशन’ मिलते रहेंगे और न्याय की गुहार लगाने वाला आम नागरिक सिर्फ अदालतों के चक्कर काटता रह जाएगा।

“जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून की धज्जियां उड़ाने वाले वाहनों को सरकारी शह मिलने लगे, तो आम आदमी अपनी सुरक्षा की भीख किससे मांगे? सतीश राउत जैसे अधिकारियों की यह कार्यप्रणाली सीधे तौर पर जनता की जान से खिलवाड़ है।”

आखिर कहां करें इन बेलगाम अधिकारियों की शिकायत?

जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई बंद हो जाए, तो हार मानने के बजाय इस लड़ाई को सीधे शीर्ष स्तर पर ले जाने की जरूरत है। इस तानाशाही और लापरवाही के खिलाफ अब सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राज्य परिवहन आयुक्त (आरटीओ चीफ) और मुंबई पुलिस कमिश्नर तक लिखित शिकायत और साक्ष्य भेजने की तैयारी की जा रही है। ‘संसद वाणी’ जनता की आवाज को दबने नहीं देगी और जब तक एकता नगर रोड को इस खतरे से मुक्ति नहीं मिलती, प्रशासन को कटघरे में खड़ा करना जारी रखेगी।

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