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मुंबई, मालवणी (स्वप्नपूर्ति सोसाइटी): म्हाडा (MHADA) के भ्रष्ट और लापरवाही से भरे रवैये का एक और बड़ा और चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। मालवणी की ‘स्वप्नपूर्ति सोसाइटी’ में नियमों की धज्जियां उड़ाकर अवैध फेडरेशन बनाने और सालों से एक ही पद पर कुंडली मारकर बैठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ‘संसद वाणी’ द्वारा बार-बार सबूतों के साथ इस मुद्दे को उजागर करने के बाद भी, म्हाडा के ‘खास अधिकारी’ बी.एस. कटरे (B.S. Katre) गहरी नींद में सोए हुए हैं।
इस पूरे फर्जीवाड़े की तीखी ग्राउंड रिपोर्ट नीचे दी गई है:
खेल-1: 5 में से 1 सोसाइटी ने नाम वापस लिया, फिर भी कटरे ने रद्द नहीं किया ‘अवैध फेडरेशन’
नियमों के मुताबिक फेडरेशन बनाने की कुछ शर्तें होती हैं, लेकिन स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत ने अपनी मर्जी से एक फेडरेशन का बोर्ड लटका दिया (जो एक बार पहले भी गिर चुका है)।
- सोसाइटी का लिखित विरोध: इस तथाकथित फेडरेशन में शामिल 5 सोसाइटियों में से एक सोसाइटी ने अपना नाम वापस ले लिया और इसकी लिखित सूचना म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे को दे दी।
- अधिकारी का संदेहास्पद मौन: कायदे से एक सोसाइटी के पीछे हटते ही इस फेडरेशन की वैधता खत्म हो जानी चाहिए थी और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए था। लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि अधिकारी बी.एस. कटरे ने इस अवैध फेडरेशन को अब तक रद्द नहीं किया है।
बड़ा सवाल: आखिर म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे, बालासाहेब भगत के इस अवैध फेडरेशन को किसका संरक्षण दे रहे हैं? नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई क्यों रोकी गई है?
खेल-2: 15 सालों से पद पर अवैध कब्जा, दर्जनों नोटिस के बाद भी ‘कुर्सी’ छोड़ने को तैयार नहीं भगत!
सहकारी समितियों और म्हाडा के नियमों को जेब में लेकर घूमने वाले बालासाहेब भगत पिछले 15 वर्षों से लगातार सोसाइटी के पद पर कुंडली मारकर बैठे हैं।
- नोटिसों की बौछार, पर असर शून्य: नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन द्वारा बालासाहेब भगत को कई नोटिस जारी किए जा चुके हैं। किसी भी ईमानदार जगह पर इतने नोटिस के बाद पद खाली करा लिया जाता है।
- अगले 5 साल की सेटिंग चालू: नोटिसों का सम्मान करने या पद छोड़ने के बजाय, बालासाहेब भगत अब अगले 5 और वर्षों तक इसी कुर्सी पर अवैध रूप से बैठने की तैयारी कर रहे हैं।
‘संसद वाणी’ का तीखा सवाल: कटरे साहब, आखिर भगत पर इतनी मेहरबानी क्यों?
हर बार की तरह इस बार भी ‘संसद वाणी’ म्हाडा प्रशासन और अधिकारी बी.एस. कटरे से सीधा और तीखा सवाल पूछता है:
- जब एक सोसाइटी ने लिखित रूप में अपना नाम वापस ले लिया, तो किस मलाईदार समझौते के तहत फेडरेशन को अब तक जिंदा रखा गया है?
- 15 साल से एक ही पद पर जमे व्यक्ति और उस पर जारी हुए दर्जनों नोटिसों पर म्हाडा अधिकारी कटरे ने अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की?
- क्या म्हाडा के अधिकारियों के लिए जनता के नियम और कोर्ट-प्रशासन के नोटिस सिर्फ रद्दी का टुकड़ा हैं?
जनता का आक्रोश: स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के आम निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब अधिकारी ही नियमों को ताक पर रखने वालों का साथ देंगे, तो आम जनता न्याय के लिए कहाँ जाएगी? ‘संसद वाणी’ इस भ्रष्टाचार और अधिकारियों की इस सांठगांठ के खिलाफ अपनी खोजी रिपोर्टिंग जारी रखेगा, जब तक कि इस अवैध कब्जे को उखाड़ नहीं फेंका जाता।