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सावधान! एकता नगर की सड़क पर खड़ा है ‘मौत’ का गोदाम, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी आखिर कब तक चलेगी यह लापरवाही?

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मुंबई, कांदिवली (पश्चिम): एक तरफ सरकार ‘सुरक्षित मुंबई’ का नारा देती है, तो दूसरी तरफ मुंबई के कांदिवली वेस्ट स्थित एकता नगर में मौत का सामान खुलेआम सड़क पर सजाया गया है। भारत गैस ने तमाम नियमों को ताक पर रखकर सड़क के बीचों-बीच अपना गैस गोदाम बना लिया है। ‘संसद वाणी’ समाचार पत्र पिछले लंबे समय से इस जानलेवा लापरवाही के खिलाफ आवाज उठा रहा है, लेकिन अफसोस! महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संबंधित प्रशासन ने जैसे अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली है।


क्या जनता की जान की कोई कीमत नहीं?

सवाल सीधा मुख्यमंत्री जी से है— क्या एकता नगर की घनी आबादी वाली जनता की सुरक्षा आपकी प्राथमिकता में नहीं है? सड़क पर गैस गोदाम का होना किसी बड़े आत्मघाती हमले से कम नहीं है। यदि किसी कारणवश यहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी उठी, तो पूरा एकता नगर पल भर में राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही ‘जांच के आदेश’ देगा? क्या मासूमों की जान जाने के बाद मुआवजे का मरहम लगाना ही सिस्टम की नियति बन चुकी है?


‘संसद वाणी’ की रिपोर्ट को अनदेखा करना पड़ा भारी!

हैरानी की बात यह है कि ‘संसद वाणी’ द्वारा बार-बार साक्ष्यों के साथ खबरें प्रकाशित करने के बावजूद, अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। ऐसा लगता है कि सिस्टम ने यह कसम खा ली है कि चाहे मीडिया कितना भी चिल्लाए, चाहे जनता कितनी भी डरी हुई हो, उन्हें फर्क नहीं पड़ता। यह चुप्पी इशारा करती है कि कहीं न कहीं भ्रष्ट तंत्र और गैस एजेंसियों के बीच सांठगांठ है, जो जनता की जान को दांव पर लगाकर फल-फूल रही है।

वक़्त रहते संभल जाइए, वरना इतिहास माफ़ नहीं करेगा

मुख्यमंत्री महोदय, आप गृह विभाग भी संभालते हैं, क्या आपके जांबाज अधिकारियों को सड़क पर बना यह बारूद का ढेर नजर नहीं आता? समय रहते इस अवैध गोदाम को हटाकर किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना अनिवार्य है। एकता नगर के निवासी आज खौफ के साये में जी रहे हैं।

‘संसद वाणी’ का प्रशासन से कड़ा सवाल: * क्या सड़क पर गैस गोदाम चलाने की अनुमति नियम देते हैं?

  • बार-बार शिकायतों के बाद भी भारत गैस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • अगर कोई अनहोनी होती है, तो क्या मुख्यमंत्री इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?

निष्कर्ष:

प्रशासन की यह ‘अनदेखी’ जनता के साथ विश्वासघात है। ‘संसद वाणी’ तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक एकता नगर के निवासियों को इस आसन्न मौत के साये से मुक्ति नहीं मिल जाती। अब गेंद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के पाले में है— उन्हें तय करना है कि वे ‘जनता के रक्षक’ बनेंगे या इस ‘सिस्टम की लापरवाही’ के मूकदर्शक।

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