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दिल्ली

बिभव कुमार को कोर्ट ने दी जमानत, इन शर्तों का करना होगा पालन

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Bibhav Kumar: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी बिभव कुमार को भी जमानत मिल गई है. स्वाति मालीवाल से मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिभव को जमानत दे दी है. हालांकि, उन पर कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं.

आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के मामले में अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी बिभव कुमार को जमानत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के आधार पर बिभव कुमार को जमानत दे दी है. रोचक बात यह है कि पिछले दो हफ्तों में मनीष सिसोदिया, के कविता और विजय नायर को भी सुप्रीम कोर्ट से ही जमानत मिली है. 

सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के मुताबिक, बिभव कुमार ना तो मुख्यमंत्री के घर या दफ्तर में जा सकते हैं और ना ही उन्हें फिर मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया जा सकता है. हालांकि, बिभव कुमार के वकील ने इन शर्तों का विरोध भी किया लेकिन कोर्ट ने यह दलील नहीं स्वीकार की और कहा कि जमानत इन्हीं शर्तों पर दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव रहे बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में ही स्वाति मालीवाल से मारपीट की. इसी केस में वह लगभग 3 महीने से भी ज्यादा समय से जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे संज्ञान में लिया कि वह 100 दिन से ज्यादा समय से जेल में हैं और इस केस में चार्जशीट फाइल की जा चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि ट्रायल कोर्ट पहले तीन महीनों में बेहद अहम और संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज कराने की दिशा में काम करें.

किन शर्तों पर मिली जमानत?

दिल्ली के सीएम के निजी सचिव नहीं बनाए जा सकते बिभव कुमार

सीएम ऑफिस से जुड़े किसी भी राजनीतिक पद पर भी नहीं होगी तैनाती

जब तक गवाहों से पूछताछ न हो जाए मुख्यमंत्री के घर नहीं जाएंगे बिभव कुमार

बिभव कुमार मुख्यमंत्री के दफ्तर भी नहीं जा सकते हैं.

इन शर्तों के विरोध में बिभव कुमार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘वह पिछले 20 साल से जुड़े हुए हैं. एक निजी सहयोगी की हैसियत से क्या वह उनके (केजरीवाल के) घर भी नहीं जा सकते हैं? सभी गवाह तो पुलिसकर्मी हैं. एक भी गवाह अन्य नहीं है. यह पूरा मामला ही उन्हें बदनाम करने का है. वह किसी के साथ काम नहीं कर सकते.’ बता दें सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक यह केस ट्रायल कोर्ट में चले याचिकाकर्ता इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी न करे.

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