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MHADA अधिकारी बी.एस. कटरे की ‘कुंभकर्णी नींद’: कब जगेगा ज़मीर? स्वप्नपूर्ति सोसाइटी में बड़े हादसे का इंतज़ार!

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मुंबई, मालवणी: प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ और लापरवाही किस कदर आम जनता की जान जोखिम में डाल सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण मालवणी की स्वप्नपूर्ति को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में देखने को मिल रहा है। ‘संसद वाणी’ द्वारा बार-बार सबूतों के साथ आगाह करने के बावजूद, म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे आरोपी अध्यक्ष को बचाने में आखिर क्यों जुटे हैं? यह अब एक बड़ा रहस्य बन गया है।


ऑटो रिक्शा स्टैंड बनी सोसाइटी: नियमों की धज्जियाँ

सोसाइटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत, जो पेशे से ऑटो रिक्शा चालक बताए जाते हैं, उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए बिल्डिंग ‘1 डी’ के परिसर को निजी ऑटो रिक्शा स्टैंड में तब्दील कर दिया है। रिहायशी इलाके में इस तरह का व्यावसायिक अतिक्रमण न केवल अवैध है, बल्कि बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।


300 किलो का ‘मौत का बोर्ड’: फिर गिरेगा तो जिम्मेदार कौन?

सोसाइटी परिसर में फेडरेशन का एक भारी-भरकम बोर्ड (लगभग 200 से 300 किलो) लगाया गया है। यह बोर्ड एक बार पहले भी गिर चुका है, जिससे बड़ी जनहानि हो सकती थी। इसके बावजूद, अध्यक्ष ने अपनी जिद में आकर उसी भारी बोर्ड को दोबारा लगवा दिया है।

  • सवाल: क्या बी.एस. कटरे किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं?
  • सवाल: एक बार गिर चुके बोर्ड को दोबारा लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?

1.08 लाख का जुर्माना, फिर भी मेहरबान हैं अधिकारी!

हैरानी की बात यह है कि म्हाडा क्षेत्र निर्माण (गोरेगांव) के अधिकारियों ने अवैध निर्माण की पुष्टि करते हुए अध्यक्ष पर 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बावजूद बी.एस. कटरे द्वारा अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई या पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।


न्यायालय की अवमानना या भ्रष्टाचार का खेल?

सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि यह पूरा विषय अब न्यायालय (Court) की दहलीज तक जा पहुँचा है। कोर्ट के संज्ञान में होने के बावजूद म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आखिर एक अधिकारी में इतना दुस्साहस कहाँ से आता है कि उसे कानून और न्यायालय का भी डर नहीं रहा? क्या बी.एस. कटरे खुद को संविधान और न्यायपालिका से ऊपर समझने लगे हैं?

बी.एस. कटरे से ‘संसद वाणी’ के सीधे सवाल:

  1. सफेदपोश संरक्षण क्यों? जब अवैध निर्माण और सुरक्षा उल्लंघन साबित हो चुके हैं, तो आप बालासाहेब भगत को संरक्षण क्यों दे रहे हैं?
  2. ज़मीर कब जगेगा? जनहित की रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है, फिर आप भ्रष्टाचार और लापरवाही के आगे मौन क्यों हैं?
  3. हादसे की जिम्मेदारी: यदि वह भारी बोर्ड दोबारा गिरता है या पार्किंग की वजह से कोई दुर्घटना होती है, तो क्या आप व्यक्तिगत रूप से इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
  4. कोर्ट का डर क्यों नहीं? मामला न्यायालय में होने के बाद भी आप कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? क्या यह सीधे तौर पर कानून की अवहेलना नहीं है?

निष्कर्ष:

मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के निवासी अब भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। अधिकारी बी.एस. कटरे की यह कार्यप्रणाली दर्शाती है कि उनके लिए नियम-कायदे नहीं, बल्कि किसी खास ‘हित’ की रक्षा सर्वोपरि है। संसद वाणी इस मामले को तब तक उठाती रहेगी जब तक कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं होता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती।

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