Connect with us

अपराध

सुप्रीम कोर्ट: सबरीमाला रेफरेंस पर 9 जजों की बेंच आज से सुनवाई शुरू, धार्मिक स्वतंत्रता vs महिलाओं के अधिकार की बहस गरमाई

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

सुप्रीम कोर्ट में केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण रेफरेंस मामले की सुनवाई आज 7 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस मामले में धार्मिक प्रथाओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन पर विचार करेगी।

बेंच का गठन और सुनवाई का शेड्यूल

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में इस 9 जजों की बेंच का गठन किया था, जिसमें CJI सूर्यकांत के अलावा अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हैं। सुनवाई 7 अप्रैल से प्रारंभ होकर 22 अप्रैल तक चलने की संभावना है, जैसा कि कोर्ट ने निर्धारित किया है। यह बेंच 2018 के ऐतिहासिक फैसले की समीक्षा याचिकाओं से उत्पन्न संवैधानिक सवालों पर फैसला लेगी।

सबरीमाला विवाद का मूल मुद्दा

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर सदियों पुरानी पाबंदी को 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया था, क्योंकि यह समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन था। मंदिर ट्रस्ट का तर्क है कि भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ माना जाता है, इसलिए यह धार्मिक परंपरा अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत संरक्षित है। अब रेफरेंस में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा, धार्मिक प्रथाओं की समीक्षा और महिलाओं की गरिमा जैसे सवाल उठे हैं।

पक्षमुख्य तर्क
महिलाओं के अधिकार समर्थकसभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार, लिंग भेदभाव समाप्ति, अनुच्छेद 14-15 का पालन।
धार्मिक संगठनपरंपराओं की रक्षा, अनुच्छेद 25-26 के तहत स्वायत्तता, आयु-आधारित प्रतिबंध कोई भेदभाव नहीं।
केंद्र सरकार2018 फैसले की समीक्षा का समर्थन, संतुलित दृष्टिकोण।

सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव

इस सुनवाई से धार्मिक आस्था और आधुनिकता के बीच बहस तेज हो गई है। अखिल भारतीय संत समिति ने हस्तक्षेप आवेदन दायर कर धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। केरल में पहले भी विरोध प्रदर्शन हुए थे, और यह फैसला अन्य धार्मिक स्थलों (जैसे मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश) पर असर डाल सकता है।

अपेक्षित परिणाम

सुनवाई के बाद कोर्ट व्यापक दिशानिर्देश जारी कर सकता है, जो धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा तय करेगी। यह निर्णय न केवल सबरीमाला बल्कि पूरे देश की धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करेगा।

Continue Reading

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.