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एक समय थी पोलियो की लड़ाई की हीरो लेकिन अब बन गई जीरो, खुद ही पोलियो का शिकार हो चुका BIBCOL

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BIBCOL Factory In Bulandshahr: कॉर्पोरेशन लिमिटेड का एक प्लांट है. यह प्लांट एक समय देश के लिए पोलियो की वैक्सीन बनाया करता है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस प्लांट ने देश को पोलियो से मुक्त कराने में अपना अहम योगदान दिया है. लेकिन आज ये प्लांट खुद ही पोलियो का शिकार हो चुका है. यहां काम करने वाले कर्मचारी रोज आते हैं और बातें करके चले जाते हैं. 

BIBCOL Factory In Bulandshahr: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की फैक्ट्री है. ये फैक्ट्री एक समय पोलियो की लड़ाई की हीरो थी. लेकिन अब जीरो बन गई है. कारण है कि इस फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों को अगस्त 2023 से वेतन नहीं मिला है  और दिसंबर 2022 से इस फैक्ट्री में एक भी सिंगल वैक्सीन का उत्पादन नहीं किया गया है. कर्मचारी आते हैं दो-चार बातें करते हैं और ड्यूटी के घंटे पूरे करके चले जाते हैं.

अपने सुनहरे दिनों में, भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU), और उसके कर्मचारी भारत से पोलियो को मिटाने के लिए लगातार काम करते रहे. लेकिन आज  इस फैक्ट्री की हालत ये है कि खुद पोलियो से ग्रस्त हो गई है.

भारत को पोलियो मुक्त कराने वाली फैक्ट्री खुद हो गई लकवाग्रस्त

बुलंदशहर में भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की फैक्ट्री हर साल करोड़ों की संख्या में पोलियो वैक्सीन का उत्पादन करती थी लेकिन वर्तमान में यह एक भूतिया हवेली बनकर रह गई है. BIBCOL की स्थापना 1989 में राजीव गांधी सरकार के तहत भारत को वैक्सीन आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करने के लिए की गई थी.

इस फैक्ट्री में जंगली जानवर ने कब्जा कर लिया है. स्थानीय पुलिस कांस्टेबल इसकी गलियों का इस्तेमाल दौड़ने के लिए ट्रैक के रूप में करते हैं. सुरक्षा कर्मियों को हटा दिया गया है, जिससे फैक्ट्री और इसकी सारी मशीनरी जब्त हो गई है.

न तो बन रही वैक्सीन न ही मिल रही कर्मचारियों को सैलरी

इस फैक्ट्री में दिसंबर 2022 से किसी भी वैक्सीन का उत्पादन नहीं हुआ है. इस प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए 2021 में इसमें को-वैक्सिन निर्माण की घोषणा की गई थी लेकिन यह घोषणा सिर्फ सरकारी घोषणा बनकर ही रह गई. यहां काम करने वाले कर्मचारी सरकारी सहायता की आस में रोज ड्यूटी पर आते हैं. लेकिन हर रोज वह सिर्फ निराशा लेकर साथ लौटते हैं.

भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बुलंदशहर प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों को अगस्त 2023 से वेतन नहीं मिला है. कर्मचारी हर महीने की एक तारीख को अपना बैंक अकाउंट चेक करते हैं.  लेकिन उनका अकाउंट में क्रेडिट की कोई डिटेल नहीं होती.

कर्मचारियों को सरकार से आस

इस प्लांट में करीब 103 कर्मचारी काम करते हैं. BIBCOL का ये प्लांट एक समय देश के प्रमुख वैक्सीन उत्पादन प्लांट में से एक हुआ करता था लेकिन आज यह सिर्फ खंडहर बनकर रह गया है.

कर्मचारी यहां तीस साल से काम कर रहे हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या उन्हें दूसरी नौकरी तलाशनी चाहिए या नहीं. वह बस सरकार से आस लगाए बैठे हुए हैं. उन्हें इस बात का भी संदेह है कि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की तरह इस सुविधा का भी विनिवेश किया जा रहा है. कर्मचारी बस इतना चाहते हैं कि केंद्र सरकार कोई ऐसा निर्णय ले जो उन्हें उनके दुख से बाहर निकाल सके.

बुलंदशहर ही नहीं हर सरकारी वैक्सीन उत्पादन यूनिट का यही हाल 

साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट में पूर्व आईएएस अधिकारी अमूल्य रत्न नंदा, अखिल भारतीय ड्रग एक्शन नेटवर्क और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई याचिका से पता चला है कि वैक्सीन बनाने वाली कई सार्वजनिक उपक्रमों की यही दुर्दशा रही है. सिर्फ बुलंदशहर ही नहीं सरकार वैक्सीन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को पुनर्जीवित करने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है.

इस याचिका के साथ एक पुरानी जनहित याचिका का भी हवाला दिया गया है जिसमें तत्कालीन यूपीए सरकार पर भ्रष्ट इरादे से निजी फार्मा कंपनियों के पक्ष में सार्वजनिक उपक्रमों को जानबूझकर नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया गया था.

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