नई दिल्ली, 11 फरवरी 2026 – साहित्य और संगीत का अनोखा संगम देखने को मिला जब उस्ताद शुजात हुसैन खान को अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में न केवल साहित्याचार्यों को पुरस्कृत किया गया, बल्कि उस्ताद खान ने अपनी सितार वादन और गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध भी किया।
अमर उजाला द्वारा आयोजित यह सातवाँ शब्द सम्मान कार्यक्रम जनपथ स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम सभागार में शाम को हुआ, जहाँ साहित्य प्रेमियों, कवियों, लेखकों और कलाकारों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई और मंच पर मुख्य अतिथि का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया।
शब्द सम्मान और संगीत का संगम
शब्दों की शक्ति और संगीत के सामंजस्य पर उस्ताद शुजात हुसैन खान ने गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने समारोह में कहा कि संगीत शब्द को और शब्द संगीत को एक नई गहराई देता है, जिससे भावनाएं और भी तीव्र रूप से उभरती हैं।
कार्यक्रम में उस्ताद खान ने अपनी विशिष्ट सितार प्रस्तुति दी और कई लोकप्रिय रचनाओं को अपनी शैली में प्रस्तुति दी, जिनमें भगवान शंकर पर आधारित बंदिश ‘दर्शन देहो शंकर महादेव’ और प्रसिद्ध गज़लों की धुनें शामिल रहीं। उनका संगीत प्रेमियों द्वारा जमकर तालियों और सराहना से स्वीकार किया गया।
विभिन्न श्रेणियों में सम्मान
समारोह में इस वर्ष साहित्य के विभिन्न विधाओं में बेहतर कार्य करने वाले साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
• हिंदी और मणिपुरी साहित्य की अग्रणी लेखिकाओं ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी को “आकाशदीप अलंकरण” जैसे उच्च सम्मान से نوازा गया।
• श्रेष्ठ कविता, कथा, कथेतर और अनुवाद जैसी श्रेणियों में भी रचनाकारों को सम्मानित किया गया।
• वहीं पहली पुस्तक के लिए पुरस्कार भी प्रदान किया गया, जिससे नई प्रतिभाओं को मंच मिला।
सांस्कृतिक माहौल और प्रतिक्रिया
सभागार में उपस्थित साहित्यकारों और दर्शकों ने कार्यक्रम को अत्यंत जीवन्त और प्रेरणादायक बताया। शब्द और संगीत के इस संगम ने उपस्थित सभी को भावविभोर कर दिया। कई आगंतुकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलती है।