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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फोन पर विस्तार से बातचीत की। दोनों नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी राष्ट्रपति मैक्रों से पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई और होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता को तुरंत बहाल करने पर सहमति बनी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री यातायात पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
होर्मुज क्यों है अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। इसी वजह से भारत और फ्रांस जैसे देश लगातार इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित नौवहन की वकालत कर रहे हैं।
पीएम मोदी पहले भी पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंता जता चुके हैं और कमर्शियल जहाजों पर हमलों तथा समुद्री मार्ग में रुकावटों को अस्वीकार्य बताया था। भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की मजबूती और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
भारत-फ्रांस साझेदारी पर जोर
मोदी और मैक्रों के बीच यह बातचीत भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को भी दिखाती है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की आजादी को प्राथमिकता देने की बात दोहराई। कूटनीतिक स्तर पर यह संदेश भी गया कि वैश्विक संकट के इस दौर में प्रमुख देशों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा का प्रभाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर तेल कीमतों, व्यापारिक आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर भी पड़ता है। ऐसे में भारत और फ्रांस की यह साझा चिंता अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।