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वाराणसी

दो दिवसीय मौन साधना एवम् व्यक्तित्व परिष्कार प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन आत्म सुधार के साथ समाज सुधार के संकल्प के साथ हुआ समापन

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वाराणसी/संसद वाणी : रविवार को गायत्री शक्तिपीठ, नगवां, वाराणसी के दिव्य प्रागंण में चल रहे दो दिवसीय मौन साधना एवम् व्यक्तित्व परिष्कार प्रशिक्षण के दूसरे दिन शिविरार्थियों ने योग, ध्यान, यज्ञ के साथ दूसरे दिन का शुभारम्भ किया। युग ऋषि के संदेश वाहक, प्रखर वक्ता, सुप्रसिद्ध कथावाचक एवम् युवाओं के मार्गदर्शक विद्याधर मिश्र ने शिविरार्थियों द्वारा लिए गए मौन व्रत से उत्पन्न ऊर्जा के अनुभव प्राप्त किया। मार्गदर्शक एवम् प्रशिक्षक विद्याधर मिश्र ने कहा कि आज कि समाजिक परिस्थितियां युवाओं को सही मार्गदर्शन के स्थान पर दिग्भ्रमित वातावरण उत्पन्न कर रही है युवा सही एवम् गलत के बीच मार्ग को चुनने में स्वयं को असहाय सा महसूस कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण आत्म बोध, आत्म विश्वास एवम् दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव है। मौन साधना एवम् व्यक्तित्व परिष्कार प्रशिक्षण के माध्यम से शिविरार्थियों द्वारा 36 घण्टे के मौन साधना, आत्म विवेचना एवम् आत्म सुधार एवम् परिष्कार के साथ आत्म बल की ऊर्जा को जगाया।

परमपूज्य गुरुदेव युग ऋषि पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के इक्कीसवीं सदी उज्जवल भविष्य के सपने को साकार करने का एक मात्र रास्ता संयमी युवा, स्वावलंबी युवा, अनुशासित युवा, राष्ट्र भक्त युवा,आत्म बल से परिपूर्ण एवम् जीवन के लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए आत्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण युवा ही हैं। आगे कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विकट एवम् डरावनी क्यों न हों आप अपनी आत्मा ऊर्जा के प्रकाश, अनुशासन एवम् आत्म बल के द्वारा परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाना ही आपके जीवन का वास्तविक लक्ष्य होना चाहिए। समापन सत्र श्री अयोध्या प्रसाद जी के ओजस्वी संगीत से हुआ।

प्रशिक्षण की व्यवस्था श्री बृजेश पटेल एवम् ओमेश्वर सेपट ने किया। समापन सत्र पर सहायक प्रबंध ट्रस्टी डॉक्टर विंध्याचल सिंह, जिला समन्वयक पण्डित गंगाधर उपाध्याय,डॉ. गौतम लाम्बा,डॉ. संतोष सिंह,डॉ. अरुण दुबे,डॉ. अरुण देशमुख,डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने शिविरार्थियों को समाज के भटके, हतोत्साहित एवम् लक्ष्य से भटके युवाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने की जिम्मेदारी से अवगत कराया। गायत्री शक्तिपीठ नगवां के प्रबंध तंत्र से जुड़े श्री रमाकांत पाठक, हरिवंश यादव एवम् श्रीमती नीलम गुप्ता का सक्रीय योगदान रहा। शिविरार्थियों में मुख्य रुप से कुमारी शांभवी सहाय, प्रियंबदा, श्रेया, दिव्या, कोमल, प्रीति, विभा, श्री क्षितिज, अवधेश कुमार, शरद, आदर्श, गौरव, सहित 25 शिविरार्थियों ने भाग लिया।

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