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दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम एक आई-20 कार में हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया। इस विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि यह कार पुलवामा निवासी डॉक्टर उमर मोहम्मद चला रहे थे, जो इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी के रूप में उभरे हैं।
कैसे खुला डॉक्टर उमर का राज़?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, डॉक्टर उमर मोहम्मद ने यह कार आमिर नाम के एक प्लंबर के नाम पर खरीदी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने तारिक नामक व्यक्ति के नाम पर सिम कार्ड भी लिया था। दोनों ही व्यक्ति जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं और अलफला संस्थान से जुड़े हुए हैं।सीसीटीवी फुटेज में उमर कार चलाते हुए दिखाई दिए, जिससे उनकी पहचान पक्की हुई।
कौन हैं डॉक्टर उमर मोहम्मद?
उमर पुलवामा के कोइल क्षेत्र के निवासी थे। वह पहले जीएमसी अनंतनाग में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर रहे और बाद में फरीदाबाद स्थित अल-फला यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।सूत्रों के अनुसार, उमर ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर विस्फोट की योजना बनाई थी और कार में अमोनियम नाइट्रेट से भरा डिटोनेटर लगाया था। यह वही विस्फोटक है जो फरीदाबाद में पहले बरामद हुआ था।
कैसे हुआ धमाका?
जानकारी के मुताबिक, जब जांच एजेंसियों ने उमर के दो साथियों — डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. आदिल रज़ा राठर — को गिरफ्तार किया और विस्फोटक ज़ब्त किए, तो उमर घबरा गए। उन्होंने घबराहट में कार को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ही उड़ा दिया।विस्फोट के बाद मौके से उमर के कुछ शरीर के हिस्से बरामद हुए, जिनका डीएनए परीक्षण चल रहा है।
परिवार ने क्या कहा?
डॉ. मुज़म्मिल के भाई आज़ाद शकील ने कहा,
हमारा आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। हमारा परिवार हमेशा से कानून का पालन करने वाला रहा है। उमर एक अच्छे इंसान थे। हमें उनसे मिलने तक नहीं दिया जा रहा है। हमारी बहन की शादी रद्द करनी पड़ी।
वहीं, डॉ. उमर मोहम्मद की मां और दो भाइयों को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, और डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं ताकि विस्फोट में मारे गए व्यक्ति की पहचान पक्की की जा सके।इस धमाके में दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के बस कंडक्टर अशोक कुमार की भी मौत हो गई। वह उत्तर प्रदेश के अमरोहा के रहने वाले थे और अपने परिवार के आठ सदस्यों के लिए कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति थे।अशोक उस दिन अपने रिश्तेदार लोकेश कुमार गुप्ता को चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन से लेने जा रहे थे। धमाके में अशोक की मौत हो गई, जबकि लोकेश अब तक लापता हैं।
जांच में नया मोड़
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, जिला पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अब तक जांच कर रही थी, लेकिन अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस केस को अपने हाथ में लेने की तैयारी में है।NIA सूत्रों का कहना है कि यह मामला अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।