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धर्म

2026 की होली होगी बेहद खास: होलिका दहन पर लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, सूतक काल सुबह से लागू

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कब लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें वैज्ञानिक समय और दृश्यता

खगोलविदों के अनुसार यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को घटित होगा और Saros श्रृंखला 133 का हिस्सा है। वैश्विक रूप से यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) है, लेकिन भारत में चाँद के क्षितिज के पास होने के कारण इस ग्रहण का केवल कुछ हिस्सा ही दिखाई देगा।

ग्रहण के प्रमुख चरण (भारतीय समयानुसार):

  • पेनुम्ब्रा की शुरुआत: शाम 4:58 बजे
  • पूर्ण ग्रहण की चरम स्थिति: 5:32 बजे
  • ग्रहण समाप्ति: रात 7:53 बजे

भारत में चंद्रमा उस समय क्षितिज पर लो-एल्टीट्यूड पर होगा, इसलिए देश के कई इलाकों में ग्रहण का केवल प्रारंभिक या अंतिम चरण दिखाई दे सकता है।

सुबह 9:39 से शाम 6:46 बजे तक सूतक काल प्रभावी

चूँकि ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दृश्यमान है, इसलिए सूतक काल मान्य होगा। यह ग्रहण से 9 घंटे पूर्व शुरू होता है और इस बार यह:

सूतक काल: सुबह 9:39 बजे से शाम 6:46 बजे तक

इस दौरान पारंपरिक रूप से:

  • पूजा-पाठ, मंदिर-दर्शन बंद रहते हैं
  • भोजन पकाना व ग्रहण करना वर्जित माना जाता है
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी होती है
  • शुभ कार्य, नए उपक्रम और महत्वपूर्ण निर्णयों से दूरी सुझाई जाती है

कई मंदिर इस अवधि में शुद्धिकरण, स्नान और पुनःप्राण प्रतिष्ठा जैसी धार्मिक प्रक्रियाएँ ग्रहण के बाद करते हैं।

होली और ग्रहण का अनोखा संयोग: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

होली का पर्व स्वयं अच्छाई की बुराई पर विजय और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं चंद्र ग्रहण हिन्दू धर्म में एक ऐसा खगोलीय चरण है जिसे “नकारात्मक शक्तियों के सक्रिय होने का समय” कहा गया है। यही वजह है कि 2026 का यह संयोग लोगों और पंडितों दोनों के लिए रुचि का विषय बन गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • ग्रहण को आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि का समय माना जाता है।
  • इस अवधि में किए गए मंत्र-जप, ध्यान और प्रार्थना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायक माने जाते हैं।
  • होलिका दहन बुराई के दहन का प्रतीक है — और ग्रहण इस प्रक्रिया को आंतरिक शुद्धि से जोड़ देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में होली का यह दुर्लभ खगोलीय मेल “पुराने बोझों को छोड़कर नई ऊर्जा ग्रहण करने” का एक विशेष अवसर बन सकता है।

क्या दिखाई देगा ‘ब्लड मून’? जानें वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा तक पहुँचने पर चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई दे सकता है, जिसे आम زبان में ब्लड मून कहा जाता है।
हालाँकि भारत में चंद्रमा क्षितिज पर बहुत नीचे होगा, फिर भी आंशिक लालिमा या गहरे नारंगी रंग की झलक दिखाई दे सकती है।

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह दृश्य मौसम और बादलों पर निर्भर करेगा।

त्योहार की तैयारियों पर पड़ेगा असर?

2026 की होली पर लग रहे ग्रहण और सूतक काल के कारण कई राज्यों में कार्यक्रमों के समय और आयोजन में बदलाव संभव है।

  • कई स्थानों पर होलिका दहन का मुहूर्त ग्रहण समाप्त होने के बाद लिया जा सकता है।
  • मंदिरों में सुबह से शाम तक विशेष प्रतिबंध लागू होंगे।
  • धार्मिक परिवार सूतक अवधि में भोजन-पकाने और यात्रा से दूरी रखते हैं।

आध्यात्मिकता और खगोल विज्ञान—दोनों के लिए दुर्लभ अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार 2026 का यह संयोजन सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
लोगों को एक ही दिन —

  • होली जैसे सांस्कृतिक उत्सव,
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसी खगोलीय घटना,
    — दोनों को अनुभव करने का अवसर मिलेगा।

यह दिन खगोलप्रेमियों, शोधकर्ताओं और धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए समान रूप से यादगार बन सकता है।

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