Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
नई दिल्ली: जमीन के बदले नौकरी घोटाले (Land for Job Case) में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अभियोजन द्वारा भरोसा न किए गए यानी “अनरिलाइड डॉक्यूमेंट्स” की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की लालू-राबड़ी की अर्जी?
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की याचिकाएं ट्रायल की गति धीमी करने का जरिया नहीं बन सकतीं। अदालत के मुताबिक, केस की प्रकृति और पहले से उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए अतिरिक्त कागजात की मांग को उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसे सुनवाई में देरी की रणनीति माना जा सकता है।
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाला?
सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का आरोप है कि रेल मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में ग्रुप डी नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से उनकी जमीन अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर करवाई। शिकायतों के अनुसार, कई आवेदकों ने बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट डीड के रूप में अपनी जमीन उन संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम की, जिनका संबंध लालू परिवार से बताया जाता है।
किन-किन पर लगे हैं आरोप?
इस मामले में पहले ही राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, उनकी पुत्री मीसा भारती, पुत्र तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सहित 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने पहले के आदेशों में टिप्पणी की थी कि सार्वजनिक रोजगार को निजी लाभ के लिए ‘बर्गेनिंग चिप’ की तरह इस्तेमाल किया गया और इसे एक संगठित साजिश की तरह अंजाम दिया गया।
आगे की कानूनी तस्वीर क्या है?
अदालत द्वारा अर्जी खारिज किए जाने के बाद अब ट्रायल की प्रक्रिया और सुचारु व तेज होने की संभावना है, क्योंकि डिफेंस की ओर से दस्तावेज़ों को लेकर की गई यह प्रमुख आपत्ति खत्म हो गई है। दूसरी ओर, लालू यादव और उनका परिवार इस पूरे मामले में पहले से ही आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताते आए हैं, इसलिए आने वाले दिनों में उच्च अदालतों में भी कानूनी लड़ाई तेज होने की उम्मीद है।