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राजनीति

ममता बनर्जी का अमित शाह पर तीखा हमला: “कई बार मौत के मुंह से लौटी हूं”

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ममता बनर्जी ने दोबारा अमित शाह पर सीधा निशाना साधा है और अपने एक तीखे बयान में बताया है कि वह “कई बार मौत के मुंह से लौटी” हैं। यह बयान तत्काल राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गया है, खासकर बंगाल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, जहां दोनों नेताओं के बीच भाषण‑युद्ध तेज हो चुका है।

बयान की पृष्ठभूमि

ममता बनर्जी ने यह टिप्पणी तब की जब उनके नाम पर अमित शाह की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सवाल उठाए गए। गृहमंत्री ने पिछले दिनों कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल सरकार को “भ्रष्टाचार, हिंसा और भेदभाव” के साथ जोड़ा और ममता पर घुसपैठ और “विक्टिम कार्ड” जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में ममता ने कहा कि वह न तो डरती हैं न ही दबाव में आकर झुकेंगी, और “मौत के मुंह से लौटने” जैसे अनुभवों के बारे में इशारा करते हुए अपने संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर को याद दिलाया।

अमित शाह के आरोप और ममता का पलटवार

ममता ने अपने बयान में अमित शाह पर यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मतदाता सूची के नाम पर बंगाल की जनता को “परेशान” कर रही है और चुनाव से पहले लाखों नाम हटाकर मतदाता सूची को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने SIR (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) के नाम पर राजबंशी, मतुआ और आदिवासी समुदायों के लोगों के नाम हटाने की बात कही और इसे अमित शाह की “चाल” बताया। इसके जवाब में शाह ने टीएमसी सरकार के खिलाफ एक “चार्जशीट” जारी कर 15‑साल के शासन को लेकर भ्रष्टाचार, घुसपैठ और हिंसा के आरोपों को फिर से तरजीह दी।

राजनीतिक दांव‑पेंच और चुनावी माहौल

इस टकराव ने बंगाल में चुनावी माहौल को और भी तीखा कर दिया है। बीजेपी अमित शाह की ओर से घुसपैठ, भ्रष्टाचार और “विक्टिम कार्ड” जैसे मुद्दों को चुनावी नारेबाजी का आधार बना रही है, जबकि ममता बनर्जी इसे “भय‑नीति” और “जनता को डराने” की रणनीति करार दे रही हैं। उनके “मौत के मुंह से लौटने” वाले बयान ने आधारवाद और आत्मविश्वास की छवि बनाने की कोशिश की है, जिसे तृणमूल हमेशा अपने जनाधार और कार्यकर्ता‑आधार को जोड़ने के लिए इस्तेमाल करती है।

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