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अयोध्या/लखनऊ: राम मंदिर की भव्यता और उसकी दिव्यता पर आज एक गहरा दाग लगता हुआ दिखाई दे रहा है। मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का जो मामला सामने आया है, वह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ किया गया अक्षम्य विश्वासघात है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस गंभीर विषय पर सरकार का रुख क्या है?
चेतावनी या जनभावनाओं को कुचलने की कोशिश?
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक कड़े भाषण में कहा, “राम भक्तों की अग्निपरीक्षा न ली जाए और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए।” यह बयान सुनने में तो धर्म के प्रति समर्पण लगता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि यह चेतावनी उन चोरों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो इस भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहे हैं। क्या यह ‘राम भक्तों’ की आड़ में सच बोलने वालों को डराने की कोशिश है?
जांच या ‘लीपापोती’ का तमाशा?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में चल रही जांच फिलहाल एक ‘मजाक’ बनकर रह गई है। जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि मुख्य सूत्रधार अभी भी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री को इस बात का अहसास नहीं है कि जिसे वे छोटी घटना मानकर दबाने की कोशिश कर रहे हैं, वह राम मंदिर के इतिहास का वह काला अध्याय बन जाएगा जिसे सदियों तक नहीं मिटाया जा सकेगा?
मंत्री और अफसर क्यों हैं मौन?
पूरा सरकारी अमला और मंत्री इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे इस भ्रम में हैं कि जनता की याददाश्त कम होती है और कुछ समय बाद सब कुछ भुला दिया जाएगा। पर वे भूल रहे हैं कि राम मंदिर और चढ़ावे की बात जब भी होगी, चोरी का यह कलंक हर बार सामने आएगा। अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों (चाहे वे किसी भी संगठन या पार्टी से जुड़े हों) पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सरकार की छवि पर ऐसा दाग होगा जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
परीक्षा की घड़ी: क्या योगी दिखाएंगे निष्पक्षता?
अब राम भक्तों की नजरें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हैं। क्या वे वास्तव में राम के सच्चे सेवक होने का प्रमाण देंगे और उन लोगों को भी नहीं बख्शेंगे जो आज सत्ता की छत्रछाया में इस महापाप को अंजाम दे रहे हैं?
फिलहाल गिरफ्तारियां तो हुई हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये गिरफ्तारियां सिर्फ मामले को दबाने का जरिया हैं, या ये किसी बड़े खुलासे की शुरुआत हैं? राम भक्त अब न्याय चाहते हैं, केवल खोखले भाषण नहीं। आने वाला समय बताएगा कि राम मंदिर की शुचिता सर्वोपरि है, या सत्ता का रसूख।