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मुम्बई

म्हाडा की जमीन पर अवैध पार्किंग और वसूली का खेल: रसीद देने से अपराध छिपता नहीं, जानिए इन पर क्या हो सकती है कानूनी कार्रवाई!

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मुंबई/संसद वाणी: मुंबई के मालवानी (सामना नगर, गेट नंबर 8) क्षेत्र में म्हाडा (MHADA) की जमीन और आपातकालीन रास्तों (Emergency Access/Fire Road) पर अवैध पार्किंग का धंधा चलाने वाले फेडरेशन और मालवानी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के पदाधिकारियों की मनमानी पर अब कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।

जब म्हाडा द्वारा नोटिस जारी कर और बुलडोजर चलाकर इस अवैध पार्किंग और अतिक्रमण को पूरी तरह अवैध घोषित किया जा चुका है, तब भी पदाधिकारियों द्वारा यह तर्क देना कि “हम पार्किंग का पैसा लेते थे और उसकी रसीद भी देते थे, इसलिए यह वैध सबूत है,” कानून की नजर में एक कमजोर और हास्यास्पद दलील है।

आइए जानते हैं कि इस तरह के कृत्यों पर सहकारिता, आपराधिक और नागरिक कानूनों के तहत क्या-क्या सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है:

1. “रसीद देने से अवैध काम वैध नहीं हो जाता”—कानून क्या कहता है?

  • सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण: म्हाडा का आपातकालीन रास्ता या खाली जमीन किसी भी प्राइवेट फेडरेशन, सोसाइटी या उसके पदाधिकारियों की निजी बपौती नहीं होती। यह जगह केवल जनता की सुरक्षा और आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड) के लिए होती है।
  • अवैध वसूली (Extortion / Unauthorized Collection): किसी सरकारी या म्हाडा की जमीन पर अवैध कब्जा करके वहां से जबरन या मासिक पार्किंग वसूलना और उसके बदले अपनी मर्जी से “रसीद” काट देना, उस अपराध को कानूनी रूप से सही नहीं साबित करता। चोरी या अवैध धंधे की पर्ची/रसीद काट देने से वह अवैध काम कानूनी नहीं बन जाता। यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा और धोखाधड़ी के दायरे में आता है।

2. म्हाडा के नोटिस और कार्रवाई के बाद भी वसूली जारी रखना—कितना गंभीर अपराध?

  • जब म्हाडा ने लिखित नोटिस देकर इसे अवैध घोषित कर दिया है और कार्रवाई कर दी है, उसके बावजूद यदि कुछ लोग (या कुछ सोसाइटियों के सदस्य) “पुरानी रसीद” या “पुराना बकाया” बताकर जनता से पैसे वसूल रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून की अवमानना (Contempt of Authority) और जबरन वसूली (Extortion) है।
  • ऐसे लोगों पर म्हाडा प्रशासन और पुलिस के माध्यम से आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

3. इन पर क्या-क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है? (What Action Can Be Taken?)

इस मामले में नियमों का उल्लंघन करने वाले फेडरेशन के पदाधिकारियों और अवैध वसूली में शामिल लोगों पर निम्नलिखित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है:

  1. आपराधिक मुकदमा (Criminal Case for Cheating & Extortion): बिना किसी अधिकार के सरकारी जमीन पर कब्जा कर जनता से पैसे ऐंठने और म्हाडा के आदेश की अवहेलना करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और अवैध वसूली का मामला बन सकता है।
  2. सहकारिता अधिनियम के तहत कार्रवाई (Action under Co-operative Societies Act): चूँकि ये लोग सोसाइटी या फेडरेशन के पद का दुरुपयोग करके इस तरह के अवैध कार्यों को अंजाम दे रहे हैं, इसलिए म्हाडा के उपनिबंधक (Dy. Registrar) द्वारा इनके खिलाफ महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत पदाधिकारियों को अयोग्य घोषित करने (Disqualification) और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
  3. भारी जुर्माना और रिकवरी (Heavy Penalties & Recovery): जितना भी अवैध पैसा इन लोगों ने जनता या वाहन चालकों से पार्किंग के नाम पर वसूला है, उसकी प्रशासनिक जांच करवाकर वह राशि जब्त की जा सकती है और दोषियों पर भारी व्यक्तिगत जुर्माना ठोका जा सकता है।
  4. सिविल कोर्ट और मीडिया हाउस द्वारा कानूनी शिकंजा: चूंकि इस मामले में वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पहले ही सिविल कोर्ट और म्हाडा के बड़े अधिकारियों (जैसे उपनिबंधक बी.एस. कटरे, संजीव जायसवाल और अन्य) को समन और नोटिस भिजवाए जा चुके हैं, अदालत में इन सभी अवैध गतिविधियों और दस्तावेजों को सबूत के रूप में पेश करके इन्हें कानूनी रूप से कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

जनता और स्थानीय नागरिकों के लिए संदेश

इस तरह की दलीलें देकर कि “हम रसीद देते थे इसलिए सब सही है,” जनता को अब और अधिक गुमराह नहीं किया जा सकता। सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग चलाना और म्हाडा के स्पष्ट आदेश के बाद भी वसूली जारी रखना सरासर कानून विरोधी है। स्थानीय नागरिकों और फ्लैट धारकों को इसके खिलाफ एकजुट होकर म्हाडा उपनिबंधक कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि इन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सके।

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