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विशेष संवाददाता, मुंबई
मालवणी गेट नंबर 8 स्थित ‘सामना नगर’ की रिहायशी सोसायटियों के आपातकालीन रास्ते (Emergency Exit) आज प्रशासनिक उदासीनता और मिलीभगत की भेंट चढ़ चुके हैं। ‘संसद वाणी’ पिछले कई वर्षों से इस गंभीर मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन मुंबई क्षेत्र निर्माण (MHADA) के अधिकारी आँखें मूंदे बैठे हैं। स्थिति यह है कि स्थानीय सोसायटियों ने एक तथाकथित ‘फेडरेशन’ बनाकर पूरे आपातकालीन रास्ते को अवैध पार्किंग और अवैध निर्माण का अड्डा बना दिया है।
न्यायालय की दहलीज पर जंग: MHADA के उपाध्यक्ष से लेकर रोहित शिंदे तक घेरे में
प्रशासनिक रवैये से तंग आकर, ‘संसद वाणी’ के मालिक ने इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अब सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में एक औपचारिक याचिका दाखिल कर दी गई है। न्यायालय के आदेशानुसार, MHADA के उपाध्यक्ष (Vice President) से लेकर रोहित शिंदे तक, सभी अधिकारियों को 7 जुलाई तक समन (Summon) मिल जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि अदालत में मामला जाने के बावजूद इन अधिकारियों के माथे पर चिंता की कोई लकीर नहीं है। उन्हें न तो कानून का डर है और न ही न्यायालय की गरिमा की परवाह। यह उनकी निरंकुश कार्यशैली का ही परिणाम है कि कानूनी कार्यवाही शुरू होने के बाद भी वे अपनी पुरानी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
दिखावे की कार्रवाई और अधिकारियों का अहंकार
शुरुआत में भारी जन-दबाव के बाद MHADA अधिकारियों ने फेडरेशन को नोटिस जारी कर 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। रही-सही कसर गोरेगांव MHADA कार्यालय में तैनात नए अधिकारी ने पूरी कर दी है, जिनका अहंकार इतना है कि वे शिकायतों को अनसुना करते हैं और विरोध करने पर पत्रकारों के नंबर तक ब्लॉक कर देते हैं।
रोहित शिंदे और संतोष कांबले की संदिग्ध भूमिका
रोहित शिंदे लगातार फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को बचाने की कोशिश में जुटे हैं और मीडिया को पिछले तीन महीनों से “आज ही लेटर जारी कर रहे हैं” का झूठा आश्वासन देकर गुमराह कर रहे हैं। वहीं, संतोष कांबले भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है।
संसद वाणी का संकल्प: “जब तक कार्रवाई नहीं, तब तक जंग जारी”
आज भी सामना नगर मालवणी में आपातकालीन रास्तों पर अवैध पार्किंग और अवैध निर्माण जोर-शोर से चल रहा है। ‘संसद वाणी’ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक न्यायालय के निर्देशों के तहत दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो जाती और आपातकालीन रास्ते पूरी तरह खाली नहीं हो जाते, तब तक यह मुहिम जारी रहेगी।
सवाल अब यह है कि क्या कोर्ट के समन के बाद भी इन अधिकारियों की नींद टूटेगी, या वे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?