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मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): क्या मुंबई नगर निगम (BMC) के नियम सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों पर हथौड़ा चलाने के लिए हैं? मलाड वेस्ट, वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ (भदरण नगर) से जो मामला सामने आया है, वह BMC के ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। यहाँ रेलवे ट्रैक के पास नियमों को पैरों तले कुचलकर भू-माफिया ‘करसन’ द्वारा खड़ा किया गया अवैध साम्राज्य, प्रशासन की कथित ‘सेटिंग’ की गवाही दे रहा है।
एक साल का मौन: कुंदन वाल्वी की भूमिका संदेह के घेरे में
हैरानी की बात यह है कि BMC के सहायक अभियंता (AE) कुंदन वळवी के पास इस अवैध निर्माण की कुंडली एक साल से मौजूद है। विभाग ने खुद इसे ‘अवैध’ घोषित करते हुए नोटिस जारी किया था, लेकिन वह नोटिस आज महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह गया है।
तीखे सवाल जो जनता पूछ रही है:
नोटिस का खौफ क्यों नहीं? जब BMC ने लिखित में काम रोकने का आदेश दिया, तो भू-माफिया करसन की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि निर्माण जारी रहे?
हथौड़ा चलाने से किसने रोका? एक साल की लंबी चुप्पी के पीछे का ‘सौदा’ क्या है? क्या अधिकारी कुंदन वाल्वी भू-माफिया के साझीदार बन चुके हैं?
रेलवे सुरक्षा के साथ खिलवाड़ क्यों? रेलवे ट्रैक के पास निर्माण के कड़े नियम हैं, फिर भी यहाँ मौत को दावत देने वाला ढांचा खड़ा किया जा रहा है।
चुनिंदा कार्रवाई का खेल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अगर कोई आम आदमी अपनी दुकान के बाहर एक ईंट भी रख दे, तो BMC का दस्ता तत्काल पहुंच जाता है। लेकिन भू-माफिया करसन के मामले में BMC के अधिकारियों को ‘लकवा’ मार जाता है। आरोप तो यह भी है कि बड़े नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की छत्रछाया में इस अवैध निर्माण को खाद-पानी दिया जा रहा है।
अब आर-पार की जंग
इस मामले को लेकर अब क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल प्रभाव से इस अवैध ढांचे पर ‘BMC का बुलडोजर’ नहीं चला, तो वे उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाएंगे और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त में मामला दर्ज कराएंगे।
BMC कमिश्नर साहब ध्यान दें: क्या आपके विभाग के अधिकारी बिक चुके हैं या फिर भू-माफिया का कद कानून से बड़ा हो गया है? मलाड की जनता जवाब मांग रही है!