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राजनीति

‘मेरे लिए संतोष की बात है कि मेरे जीवन का एक अजनबी पर प्रभाव पड़ा…’, शशि थरूर ने किसे कही ये बात 

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शशि थरूर अपनी विशाल शब्दावली और कम-ज्ञात शब्दों के उपयोग के लिए भी लोकप्रिय हैं, जो समय-समय पर सोशल मीडिया ट्रेंड बनाते हैं. सोशल मीडिया पर थरूर काफी एक्टिव रहते हैं. मनीष सिंह नाम के एक यूजर एक्स पर उनके बारे में लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा, जिसे पढ़कर शशि थरूर ने प्यारा से जवाब दिया. 

शशि थरूर की पहचाना एक पढ़े लिखे नेता के रूप में की जाती है. चार बार सांसद रहे शशि थरूर एक प्रमुख कांग्रेसी राजनेता हैं और केरल के तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य हैं. उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों शामिल हैं. वह अपनी विशाल शब्दावली और कम-ज्ञात शब्दों के उपयोग के लिए भी लोकप्रिय हैं, जो समय-समय पर सोशल मीडिया ट्रेंड बनाते हैं. सोशल मीडिया पर थरूर काफी एक्टिव रहते हैं. मनीष सिंह नाम के एक यूजर एक्स पर उनके बारे में लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा, जिसे पढ़कर शशि थरूर ने प्यारा से जवाब दिया है. 

मनीष सिंह ने लिखा कि बेटे को क्या बनते देखना चाहते हो?  चाय पीने आये एक दोस्त ने पूछा, तो कुछ अस्पस्ट सा उत्तर दिया था मैंने. पर लम्हे में दिमाग मे एक तस्वीर उभरी थी.. शशि थरूर. शिक्षा, योग्यता, समझ, व्यक्तित्व, लोक व्यवहार, मुस्कान और सिचुएशन हैंडलिंग. खुद के कदमो से चलाकर यूएन के अंडर सेक्रटरी जनरल तक ले जा सकती हैं.  ऐसे मकाम, आपका “आप” होना ही वहां तक ले जा सकता है.  फिर पद, पोजिशन ओहदे तो आते जाते रहते हैं, वजन व्यक्तित्व का होना चाहिए. उस नाम का, उस शख्स काऔरा होना चाहिए और जहां थरूर होते हैं, उस फोरम पर सबकी नजरों में वही होते हैं. तो थरूर संज्ञा नही, विशेषण है. 

‘जन्मे यूके में मगर बचपन भारत मे गुजरा’

मनीष सिंह ने लिखा, जन्मे यूके में मगर बचपन भारत मे गुजरा, दिल्ली के सेंट-स्टीफेंस से एमए किया. फिर मैसाच्युसेट्स की टफ्ट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया.  हम सेवेंटीज की औलादें और मिलेनियल्स छोकरे.. जो आज उनकी छोरियों के साथ तस्वीरों पर फिकरे कसते हैं. जानना चाहिए कि हम जब बोलना सीख रहे थे न साहब शशि थरूर इंटरनेशनल रिलेशन्स पर पीएचडी कर, डॉक्टर हो चुके थे. उस वर्ष यूनिवर्सिटी का बेस्ट स्टूडेंट का खिताब भी दक्षिणा में लेकर निकले. 1978 में उन्होंने यूनाइटेड नेशन जॉइन किया. जो विंग रेस्क्यू मिशन चलाती है, वहां काम किया.

अगले पच्चीस साल अपने संगठन की सीढियां चढ़ते गए, दुनिया के हर देश, हर नेता, हर डिप्लोमेट से डील किया. सिंगापुर बोट क्राइसिस हैंडल किया, यूगोस्लाविया की टूट के दौरान सक्रिय रहे. इज्जत हासिल की, दोस्त बनाये.  UN में अपनी विंग के हेड हुए. 2002 कोफी अन्नान ने उन्हें अंडर सेकेट्री जनरल बना दिया. हिंदी में बोले तो संयुक्त राष्ट्र का उप महासचिव.

‘लोकप्रिय हैं,जहीन हैं, मजे में है’

शशि थरूर भारत आ गए. कांग्रेस का न्योता मिला, चुनाव लड़े, जीते. सरकार ने सीधे विदेश मंत्रालय थमा दिया, जो उन्होंने बखूबी संभाला.  सुनंदा पुष्कर मामला जरूर विवादों में लाया. लंबे विवाद में उन्हें उलझाने वालो को फटकार लगाकर, कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी कर दिया.  लेकिन एक संस्कारी विश्वगुरु देश मे ऐसा विवाद, छवि से चिपक जाता है. शायद ये उनकी एक बड़ी बाधा है, जो अब आगे सदा चिपकी रहेगी, पर वे त्रिवेंद्रम से लगातार सांसद हैं. कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा. पार्टी के बदतरीन दौर में, उसकी बागडोर लेकर कुछ कर दिखाने का माद्दा दिखाया. यह उनके भीतर का लोहा दर्शाता है. चुनाव हारे, लेकिन अलमस्त हैं. राजनीतिक क्षेत्र में उनके पास जो भी है, प्रोफेशनल जीवन के बाद मिला “एक्स्ट्रा” है.  सो लोड नही लेते. लोकप्रिय हैं,जहीन हैं, मजे में है. किताबे लिखते हैं, सन्सद में बोलते हैं, यूनिवर्सिटी कॉलेज में व्याख्यान देते हैं. हंसाते हैं, लुभाते हैं. 

शशि थरूर का जवाब

इस पोस्ट पर शशि थरूर ने जवाब दिया है. उन्होंने लिखा, हालांकि हम कभी भी एक-दूसरे से नहीं मिले हैं या हमारा कोई संपर्क नहीं है, लेकिन आप मेरे बारे में यह सब कहने के लिए आश्चर्यजनक रूप से दयालु और उदार रहे हैं. आपकी इस बात ने मेरे हृदय को छुआ है और मैं विनम्रतापूर्वक यह कहना चाहता हूं कि मेरे लिए यह बहुत संतोष की बात है कि मेरे जीवन और काम का एक अजनबी पर इस तरह का प्रभाव पड़ा है. यह सब कहने के लिए  आपको मेरा हार्दिक धन्यवाद . मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं.

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