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सेवा स्वीकार करने से पहले किसी का धर्म नहीं देखते कांवड़ यात्री’, JDU और चिराग के बाद जयंत ने भी किया विरोध 

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Kanwar Name Plate Row: उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ रूट पर स्थिति दुकानों को नेम प्लेट लगाने के निर्देश दिए हैं. इस आदेश का राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं. कई पार्टियों ने इसका किया. यहां तक एनडीए में शामिल पार्टियों ने भी इस फैसले का विरोध किया. एनडीए के प्रमुख घटक जेडीयू, एलजेपी JDU, LJP के बाद अब RLD चीफ जयंत चौधरी ने भी इसका विरोध किया. उन्होने कहा कि कांंवड़ यात्री किसी भी दुकानदार का धर्म नहीं देखते.

Kanwar Name Plate Row: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की भाजपा सरकार के कांवड़ यात्रा रूट पर स्थित खाने पीने की दुकानों के मालिकों को नाम प्रदर्शित करने के निर्देश की आलोचना करने वाले नेताओं में अब NDA के सहयोगी और RLD चीफ केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का भी नाम जुड़ गया है. उन्होंने कहा है कि कांवड़ यात्री सेवा स्वीकार करने से पहले लोगों का धर्म नहीं देखते हैं.

22 जुलाई से सावन की शुरुआत हो रही है. उससे पहले यूपी और उत्तराखंड की सरकार ने कांवड़ रूट पर लगने वाले दुकानों के मालिकों को निर्देश दिया है कि वह अपनी दुकान पर अपना नाम प्रदर्शित करें. इसे लेकर कई राजनीतिक दलों ने विरोध जताया है.

जयंत बोले कांवड़ यात्री नहीं देखते किसी का धर्म 

जयंत चौधरी से यूपी सरकार ने कांवड़ यात्रा निर्देश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया था और सरकार अब भी इस पर कायम है. यह कोई मुद्दा नहीं है. हमारा रुख प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है। यह पूरी पार्टी का रुख है. हम कांवड़ियों की सेवा में शामिल हैं.”

उन्होंने आगे कहा – कांवड़ लेकर जाने वाला व्यक्ति किसी धर्म नहीं चेक करता. सेवा करने वाले लोग उनसे आशीर्वाद लेते हैं. सेवा लेने से पहले कांवड़ यात्री कोई जाति और धर्म नहीं देखता और इस मुद्दे को जाति और धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.”

मैकडॉनल्ड्स अपना नाम क्या लिखे

RLD चीफ ने योगी सरकार के नेम प्लेट निर्देश का विरोध करते हुए कहा कि सभी संगठन अपने नाम लिख सकते हैं. मालिक और ब्रांड अलग-अलग हो सकते हैं. मैकडॉनल्ड्स क्या लिखेगा?”

इससे पहले इस मुद्दे पर चिराग पासवान ने कहा था कि वह ऐसे निर्देशों का समर्थन नहीं करते हैं जो दो धर्म के लोगों को बांटता हो. देश में दो ही प्रकार के लोग हैं अमीर और गरीब. दोनों के बीच बड़ी खाई है. हर एक सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वह गरीबों के लिए काम करे. गरीब में समाज के सभी वर्ग जैसे दलित, पिछड़े, ऊंची जातियां और मुसलमान भी शामिल हैं.

अपने फैसले पर अडिग है बीजेपी

आलोचना के बाद भी बीजेपी अपने निर्देश पर अडिग है. इसके पीछे वह तर्क दे रही है कि ऐसा नियम पिछले साल भी था. पूर्व मंत्री संजीव बालियान ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सांप्रदायिक विभाजन कराने की कोशिश कर रहे हैं.

JDU ने भी जताई थी आपत्ति

केंद्र की एनडीए सरकार में शामिल जेडीयू, आरएलडी और एलजेपी (रामविलास पासवान) ने यूपी सरकार के नियमों पर आपत्ति जताई है. सबसे पहले जेडीयू ने इस निर्देश पर आपत्ति जताई थी. यूपी के मुजफ्फरनगर प्रशासन ने सबसे पहले ये आदेश जारी किया था. इस आदेश को लेकर जेडीयू के केसी त्यागी ने कहा था कि यूपी से बड़ी कांवड़ यात्रा बिहार में निकाली जाती है लेकिन हमारे यहां ऐसे कोई निर्देश दिया गया. यूपी सरकार को ये निर्देश वापस लेना चाहिए

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