मुंबई की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) में महापौर पद के आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है। संभावित आरक्षण को देखते हुए सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं, जिससे महानगर की राजनीति में नया मोड़ आता दिख रहा है।
दलों की रणनीति और बयानबाज़ी
महापौर पद का आरक्षण किस वर्ग या श्रेणी के लिए होगा—इसी सवाल पर सियासी बयानबाज़ी चरम पर है। सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ही अपने-अपने हितों को साधने की कोशिश में हैं। नेताओं के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आरक्षण की घोषणा होते ही उम्मीदवार चयन, गठबंधन गणित और शक्ति-संतुलन पर सीधा असर पड़ेगा।
सत्ता संतुलन पर पड़ेगा असर
BMC देश की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में गिनी जाती है। ऐसे में महापौर पद का राजनीतिक महत्व अत्यधिक है। आरक्षण की दिशा स्पष्ट होते ही यह तय माना जा रहा है कि कुछ दलों को बढ़त मिलेगी, जबकि कुछ को नई रणनीति बनानी पड़ेगी। यही वजह है कि पर्दे के पीछे बैठकों का दौर भी तेज है।
मुंबई की राजनीति में बढ़ी हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण का फैसला न केवल महापौर चुनाव, बल्कि आगामी नगर निकाय राजनीति की दिशा भी तय करेगा। Mumbai में सत्ता की धुरी माने जाने वाले BMC पर पकड़ बनाए रखना हर दल की प्राथमिकता है।