Connect with us

व्यापार

SEBI की सख्त चेतावनी: डिजिटल गोल्ड में निवेश से बचें, अनरेगुलेटेड प्लेटफॉर्म्स पर पैसा फंस सकता है – जानें सुरक्षित विकल्प!

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Mumbai News: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड प्रोडक्ट्स को लेकर निवेशकों को बड़ा अलर्ट जारी किया है। रेगुलेटर ने साफ कहा है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ऐप्स पर बेचा जा रहा डिजिटल गोल्ड पूरी तरह अनरेगुलेटेड है, यानी SEBI के दायरे से बाहर। ऐसे निवेश में काउंटरपार्टी रिस्क और ऑपरेशनल रिस्क बहुत ज्यादा हैं, जिससे आपका पूरा पैसा डूब सकता है।

SEBI की प्रेस रिलीज (PR No. 70/2025) में कहा गया है कि ये प्रोडक्ट्स न तो सिक्योरिटीज हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव्स के तहत आते हैं। अगर प्लेटफॉर्म दिवालिया हो गया, फ्रॉड हुआ या कोई तकनीकी दिक्कत आई, तो निवेशकों को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। SEBI के निवेशक संरक्षण तंत्र जैसे ग्रिवांस रिड्रेसल या कंपंसेशन फंड यहां लागू नहीं होते।

डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है क्योंकि यहां ₹10-₹100 से भी सोना खरीदा जा सकता है। प्लेटफॉर्म्स दावा करते हैं कि सोना आपके नाम पर वॉल्ट में सुरक्षित है और कभी भी बेचा या फिजिकल ज्वेलरी में बदला जा सकता है। लेकिन SEBI ने चेताया कि ये सिर्फ मार्केटिंग है – असल में कोई रेगुलेटरी बैकअप नहीं। फोनपे, गूगल पे, पेटीएम, अमेजन पे, तनिष्क डिजिगोल्ड, MMTC-PAMP जैसे बड़े नाम भी इसमें शामिल हैं, लेकिन इन पर भी SEBI की निगरानी नहीं।

मुख्य जोखिम क्या हैं?
  • काउंटरपार्टी रिस्क: प्लेटफॉर्म या उसका पार्टनर (वॉल्ट keeper) डिफॉल्ट कर दे तो पैसा वापस नहीं मिलेगा।
  • ऑपरेशनल रिस्क: साइबर अटैक, टेक्निकल फेलियर या फ्रॉड से नुकसान।
  • कोई रिकवरी नहीं: SEBI, RBI या कोई सरकारी बॉडी मदद नहीं करेगी – कोर्ट जाना पड़ेगा, जो महंगा और लंबा प्रोसेस।
  • हिडन चार्जेस: स्प्रेड, स्टोरेज फीस और रिडेम्पशन पर एक्स्ट्रा कटौती।

SEBI के सुझाए सुरक्षित विकल्प

अगर सोने में निवेश करना है तो केवल रेगुलेटेड ऑप्शंस चुनें:

  • गोल्ड ETF: म्यूचुअल फंड्स के जरिए, स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं। कम खर्च, लिक्विड और पारदर्शी।
  • इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR): एक्सचेंज पर ट्रेडेबल, फिजिकल गोल्ड की इलेक्ट्रॉनिक रसीद।
  • गोल्ड कमोडिटी डेरिवेटिव्स: MCX जैसे एक्सचेंज पर फ्यूचर्स/ऑप्शंस।
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB): सरकार बैक्ड, 2.5% ब्याज + टैक्स बेनिफिट।

ये सभी SEBI-रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी (ब्रोकर, म्यूचुअल फंड्स) के जरिए उपलब्ध हैं और निवेशक सुरक्षा पूरी तरह लागू होती है।

निवेशकों के लिए तुरंत सलाह
  • अभी डिजिटल गोल्ड होल्डिंग्स चेक करें – जल्दी से रेगुलेटेड ऑप्शंस में शिफ्ट हों।
  • प्लेटफॉर्म की वैल्ट पार्टनरशिप, सर्टिफिकेट और टर्म्स ध्यान से पढ़ें।
  • SEBI की वेबसाइट या रजिस्टर्ड एडवाइजर से कन्फर्म करें।
  • छोटी रकम से भी शुरू करें तो रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स ही चुनें – सुरक्षा पहले!

2025 में गोल्ड की रैली के बाद निवेश बढ़ा है, लेकिन SEBI का ये अलर्ट साफ संदेश है: चमकदार ऑफर्स पर भरोसा न करें, रेगुलेशन चेक करें। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल गोल्ड की सुविधा अच्छी है, लेकिन सुरक्षा नहीं – ETF या EGR में स्विच करें तो पैसा सुरक्षित रहेगा।

Continue Reading

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.