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मुम्बई

म्हाडा की जगह पर अवैध पार्किंग का खेल: कांदिवली ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल..

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मुंबई, 21 सितंबर 2025 (संसद वाणी/वशिष्ठ वाणी न्यूज डेस्क): सामना नगर मालवाणी गेट नं 8 पर म्हाडा की जगह पर अवैध पार्किंग की समस्या ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। आपको बता दें कि ५ सोसायटी मिलकर एक फेडरेशन बनाते हैं, और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत द्वारा अवैध पार्किंग शुरू कर दिया, अब जब यह विषय म्हाडा को पता चला तो उन्होंने तत्काल फेडरेशन को अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी कर दिया, जिसके बाद अवैध पार्किंग बंद हो गया, पर कुछ दिनो पहले फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत और उनके सदस्य कांदिवली ट्रैफिक पुलिस अधिकारी से मांग करते हैं, अब सवाल यह है कि जबकि म्हाडा अधिकारी कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करते हैं। लेकिन ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सतीश राउत पर यह आरोप लग रहा है कि वे ‘यह म्हाडा की जगह है, हम कार्रवाई नहीं कर सकते’ कहकर मामला टाल देते हैं। क्या ट्रैफिक पुलिस को ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं? और क्या किसी के दबाव में कार्रवाई रुक सकती है? संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी की टीम ने इस मुद्दे की गहराई से पड़ताल की है।

म्हाडा के नोटिस के बाद फेडरेशन अध्यक्ष और सचिव ने नोटिस चिपका कर वाहन बाहर करने के लिए कहा फिर आज फेडरेशन का अध्यक्ष कांदिवली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को गुमराह क्यों किया जा रहा है..?

अवैध पार्किंग की समस्या: फायर ब्रिगेड का रास्ता भी अवरुद्ध

म्हाडा ने कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन को लिखे पत्र में साफ कहा है कि कॉलोनी के दोनों तरफ अवैध पार्किंग के कारण आपातकालीन स्थिति में गंभीर खतरा है। अगर बिल्डिंग में कोई दुर्घटना या आग लगती है, तो फायर ब्रिगेड के वाहनों को अंदर आने में भारी परेशानी हो सकती है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि ऐसी स्थिति में जान-माल की हानि का जिम्मेदार कौन होगा?

म्हाडा अधिकारियों द्वारा कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन को पत्र द्वारा लिखित शिकायत का प्रमाण।

पिछले कुछ महीनों में कांदिवली ट्रैफिक पुलिस ने इस अवैध पार्किंग पर कई चालान भी काटे थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सतीश राउत की कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन में नियुक्ति हुई, कार्रवाई थम गई। आरोप है कि अवैध निर्माण और पार्किंग को बढ़ावा देने वाले बालासाहेब भगत ने राउत से मुलाकात की, और उसके बाद से कोई सख्ती नहीं हो रही। क्या यह महज संयोग है या दबाव का नतीजा? स्थानीय निवासियों का कहना है कि पार्किंग माफिया फेडरेशन का नाम लेकर कॉलोनी की जमीन पर कब्जा जमा रहे हैं, और पुलिस चुप्पी साधे है।

विश्लेषण:

  • ट्रैफिक पुलिस का यह दावा कि “म्हाडा की जगह है, इसलिए कार्रवाई नहीं कर सकते” कानूनन सही नहीं है। अवैध पार्किंग, चाहे वह किसी भी जमीन पर हो, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, और ट्रैफिक पुलिस को इस पर कार्रवाई करनी होगी।
  • अगर अवैध पार्किंग से फायर ब्रिगेड या अन्य आपातकालीन सेवाओं को बाधा पहुंच रही है, तो यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत भी गंभीर मामला है।
  • ट्रैफिक पुलिस का कार्रवाई से इनकार करना कर्तव्य में लापरवाही माना जा सकता है, जिसके लिए स्थानीय निवासी या म्हाडा उच्च अधिकारियों, मालवणी पुलिस, या बॉम्बे हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

मीडिया से बातचीत में ‘तू-तड़ाक’: नियमों की आड़ में टालमटोल

संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी की टीम ने जब सीनियर अधिकारी सतीश राउत से इस मुद्दे पर बात की, तो उन्होंने पहले तो नियम-कानून की दुहाई दी। फिर कहा, “म्हाडा खुद आकर वाहन हटवाए।” जब पत्र का हवाला दिया गया, तो पहले उन्होंने पत्र को पुराना बताया, फिर उन्होंने सुझाव दिया कि “म्हाडा को दिक्कत है तो मालवणी पुलिस स्टेशन जाएं।” बातचीत के दौरान राउत पर ‘तू-तड़ाक’ भी शुरू हो गया, जो एक वरिष्ठ अधिकारी के लिए शोचनीय है। टीम ने सवाल किया कि क्या ट्रैफिक पुलिस को अवैध पार्किंग पर कार्रवाई का अधिकार नहीं? जवाब में राउत ने सिर्फ म्हाडा की जगह होने का हवाला दिया।

ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 283 के तहत सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध पैदा करने वाली पार्किंग अवैध है, चाहे वह किसी सरकारी जगह पर हो। महाराष्ट्र मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ट्रैफिक पुलिस को चालान काटने और वाहन हटाने का पूर्ण अधिकार है। फिर सवाल उठता है: क्या म्हाडा जैसी सरकारी एजेंसी की शिकायत पर कार्रवाई न करना नियमों का उल्लंघन नहीं?

राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक लापरवाही?

कॉलोनी के निवासी परेशान हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पार्किंग माफिया ने फेडरेशन बनाकर जगह पर कब्जा कर लिया। म्हाडा का पत्र भी बेकार गया। पहले चालान कटते थे, अब सब रुक गया।” बालासाहेब भगत पर अवैध निर्माण कराने का आरोप लग रहा है, जो स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाते हैं। क्या उनकी मुलाकात के बाद कार्रवाई रुकना महज इत्तेफाक है?

मुंबई ट्रैफिक पुलिस के नियमों के अनुसार, अवैध पार्किंग पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है, खासकर जहां आपात सेवाओं पर असर पड़ता हो। कांदिवली जैसे घनी आबादी वाले इलाके में यह समस्या ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है।

आगे क्या? कार्रवाई की मांग, जरूरत पड़ी तो कोर्ट का द्वाराजा भी खटखटाया जाएगा

संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखने की तैयारी में है, साथ ही जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। क्या कांदिवली ट्रैफिक पुलिस म्हाडा की शिकायत पर कार्रवाई करेगी? या यह मामला मालवणी पुलिस तक सीमित रहेगा? पाठकों से अपील है कि अगर आपके इलाके में ऐसी समस्या है, तो हमें बताएं। ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही के लिए मीडिया हमेशा आपके साथ है।

निष्कर्ष:

कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि कांदिवली ट्रैफिक पुलिस को अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, और “म्हाडा की जगह” होने का बहाना बनाकर कार्रवाई से इनकार करना नियमों का उल्लंघन है। संसद वाणी मीडिया को चाहिए कि वह इस मामले को ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों या कोर्ट तक ले जाए।

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