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मुम्बई

मालवणी रो रही, असलम हंस रहे: अवैध गार्डन ही उनका ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’!

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मालवणी/संसद वाणी (स्पेशल): मालवणी के विधायक असलम शेख को अगर विकास की चिंता होती, तो शायद आज इलाके में सड़कें चौड़ी होतीं, ट्रैफिक जाम एक पुरानी याद बन चुका होता, और लोग बिना सिर दर्द के घूमने आते। लेकिन लगता है, उनके ‘कार्य सम्राट’ वाले टाइटल का मतलब कुछ और ही है – अवैध निर्माणों का जश्न मनाना! सरकारी फंड का इस्तेमाल सड़कों या स्कूलों के लिए नहीं, बल्कि मालवणी गेट नंबर 8 के पास ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी की खाली जमीन पर ‘अवैध गार्डन’ उगाने और 10 साल पुराने वॉटर टैंक पर ओपन शेड ठोकने में हो रहा है। क्या बात है, विधायक साहब! विकास का इंतजार कर रहे निवासियों को तो कम से कम ‘हरी-भरी’ सैर कराने का बहाना तो मिल गया।

सवाल यह है कि जब म्हाडा ने ही दो बड़े-बड़े गार्डन के लिए जगह मुहैया कराई है, तो ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी की वह ‘खाली’ जमीन क्यों निशाने पर? हमारे मीडिया के लीगल सलाहकारों ने तो विधायक जी को पत्र लिखकर ब्लूप्रिंट तक भेज दिया – ‘ये गार्डन की जगह नहीं, सर!’ लेकिन शायद कानून की भाषा उनके ‘निर्माण उत्साह’ के आगे फीकी पड़ गई। अब वशिष्ठ मीडिया ने इस ‘अवैध सौंदर्यीकरण’ को कोर्ट की चौखट पर पहुंचा दिया है। जल्द ही असलम शेख को नोटिस मिलेगा, और तब शायद ‘कार्य सम्राट’ का क्राउन थोड़ा झुकेगा।

और हां, वो 10 साल पुराना वॉटर टैंक पर ओपन शेड? लगता है, विधायक साहब को लगता है कि टैंक पर नाच-गाना और पार्टी का इंतजाम जरूरी है। लेकिन सोचिए, अगर शेड ढह गया, नाचते-गाते लोग गिर पड़े, तो जिम्मेदार कौन? विकास के नाम पर फंड खर्च करने वाले या अवैध निर्माण के ‘प्रमोटर’? मालवणी के निवासी तो पहले ही ट्रैफिक की मार से त्रस्त हैं – इतनी समस्याएं कि उंगलियों पर गिनना मुश्किल। हमारी टीम ने विधायक जी से विकास पर बात करने की कोशिश की, लेकिन जवाब? कान में जूं न रेंगी! लगता है, जीत की कुर्सी पर बैठे-बैठे विकास भूल गए, बस अवैध 3 मंजिला इमारतें या शेड खड़े करने की होड़ लगी है।

मालवणीवासी सवाल पूछ रहे हैं: क्या विधायक का ‘फितरत’ अब सिर्फ अवैध को बढ़ावा देने तक सिमट गया? कोर्ट का फैसला आएगा, लेकिन तब तक निवासी इंतजार करेंगे – शायद अगली बार सरकारी फंड से कोई ‘ट्रैफिक-फ्री’ गार्डन तो मिल जाए! संसद वाणी इस मुद्दे पर नजर रखे हुए है। क्या कहते हैं आप? कमेंट में बताएं।

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