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म्हाडा के नोटिस को ठेंगा: सोसाइटी कमेटी की पुरानी राशि वसूली, भ्रष्टाचार का खेल?

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मुंबई/संसद वाणी। (स्पेशल रिपोर्ट): महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) द्वारा जनवरी 2025 में जारी अवैध पार्किंग नोटिस के बावजूद, मुंबई की कई सोसाइटीज में कमेटी सदस्य पुरानी पार्किंग राशि वसूलने पर अड़े हुए हैं। यह पार्किंग सरकारी जमीन पर फायर ब्रिगेड के लिए आरक्षित स्थान पर अवैध रूप से चलाई जा रही थी, जो अब बंद हो चुकी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी के अध्यक्ष और सचिव न केवल जान जोखिम में डालकर रोड ब्लॉक कर रहे थे, बल्कि वाहन मालिकों को धोखा देकर राशि ऐंठ रहे थे। फेडरेशन स्तर पर भी यह अवैध गतिविधि चली, लेकिन म्हाडा अधिकारियों की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। क्या यह भ्रष्टाचार का खेल है? निवासियों की आवाज उठ रही है।

अवैध पार्किंग का काला कारोबार: फायर ब्रिगेड स्पेस पर कब्जा

सामना नगर मालवाणी गेट नं 8 पर, म्हाडा कॉलोनियों में कई सोसाइटीज ने सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग शुरू कर दी थी। यह जगह मूल रूप से फायर ब्रिगेड के लिए आरक्षित थी, ताकि आपातकाल में वाहनों की आसान पहुंच हो सके। लेकिन फेडरेशन और सोसाइटी के अध्यक्ष-सचिवों ने मिलकर यहां पार्किंग स्लॉट बनाए, रोड लॉक कर दिया और निवासियों से मासिक या डिपॉजिट राशि वसूली करने लगे। एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ये लोग जानबूझकर रास्ते ब्लॉक करते थे, जिससे एम्बुलेंस या फायर ट्रक की एंट्री मुश्किल हो जाती। हमारी जान से खिलवाड़ हो रहा था, फिर भी राशि वसूली जाती रही।”

म्हाडा अधिकारी द्वारा अवैध पार्किंग के खिलाफ नोटिस जारी।

फरवरी 2025 में म्हाडा ने सख्त नोटिस जारी कर इन पार्किंग को अवैध घोषित किया और बंद करवा दिया। फिर भी, सोसाइटी कमेटी के सदस्यों का तर्क है, “नोटिस बाद की पार्किंग बंद हुई, पुरानी राशि तो देनी पड़ेगी।” यह दावा कानूनी रूप से गलत है, क्योंकि महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम (MCS Act) की धारा 78 के तहत, अवैध गतिविधि से कोई राशि वसूली वैध नहीं मानी जाती।

सोसाइटी कमेटी का डंका: नियमों की अनदेखी, निवासियों का विरोध

निवासियों का कहना है कि अध्यक्ष और सचिव “डंके की चोट पर” पुरानी राशि मांग रहे हैं, जो सोसाइटी के बायलॉ (नंबर 77a और 172-174) का उल्लंघन है। एक प्रभावित निवासी ने कहा, “म्हाडा ने स्पष्ट नोटिस दिया, फिर भी ये लोग कहते हैं ‘देना पड़ेगा’। यह हितों के टकराव (conflict of interest) है। फेडरेशन के सभी अध्यक्ष-सचिवों ने मिलकर यह सिस्टम चलाया, लेकिन अब कार्रवाई का नामोनिशान नहीं।”

मुंबई फायर ब्रिगेड के नियमों के अनुसार, ऐसी पार्किंग न केवल ट्रैफिक जाम पैदा करती है, बल्कि आपातकाल में जानलेवा साबित हो सकती है। 2018 के सरगम सोसाइटी फायर केस में भी पार्किंग ब्लॉकेज के कारण फायर टेंडर अंदर नहीं घुस पाए थे, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में म्हाडा अधिकारियों पर “कॉलोसल मिसयूज ऑफ अथॉरिटी” का आरोप लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं, जो अवैध निर्माणों से जुड़े हैं।

म्हाडा अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का साया: कार्रवाई क्यों नहीं?

निवासियों का आरोप है कि म्हाडा अधिकारी एम.वी. माकणे (म.वि.माकणे) द्वारा अब तक कोई कार्रवाई न करने से भ्रष्टाचार का संदेह गहरा गया है। हाल के मामलों में म्हाडा के एक अधिकारी को अवैध संरचना पर कार्रवाई न करने के लिए 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गिरफ्तार हुआ। एक अन्य स्कैम में शगुन रियल्टी और म्हाडा अधिकारियों ने मिलकर अवैध बेदखली और फर्जी नोटिस जारी किए। निवासी पूछते हैं, “म्हाडा चाहती तो फेडरेशन और सोसाइटी कमेटी पर कड़ी कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन चुप्पी क्यों? क्या भ्रष्ट अधिकारियों का राज चलेगा?”

म्हाडा के सर्कुलर के अनुसार, अवैध संरचनाओं पर अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने हाल ही में म्हाडा के इंजीनियरों के खिलाफ रिश्वतखोरी के केस दर्ज किए हैं।

निवासियों की मांग: तत्काल जांच और कार्रवाई

निवासी अब डेप्युटी रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (DRCS) और म्हाडा के हेल्पलाइन (1800-1200-8040) पर शिकायत करने की तैयारी में हैं। वे MCS Act की धारा 73(1AB) के तहत कमेटी सदस्यों को अयोग्य घोषित करने और जुर्माना लगाने की मांग कर रहे हैं। एक निवासी ने कहा, “ऐसे अधिकारियों और कमेटी सदस्यों के रहते अवैध कार्य जारी रहेंगे। हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।”

म्हाडा ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पार्किंग संकट को और गहरा सकता है, जहां नई वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए पार्किंग प्रूफ अनिवार्य हो गया है। क्या म्हाडा इस ‘अवैध कारोबार’ पर लगाम लगाएगी, या भ्रष्टाचार की जड़ें और मजबूत होंगी? निवासियों की चुप्पी टूट चुकी है—अब कार्रवाई की बारी है।

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