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बीजेपी की ‘अजेय’ जीत: विकास की जगह ‘विश्वास’ का जादू, या सिस्टम का कमाल?

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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। जनता महंगाई से त्रस्त, बेरोजगारी से परेशान, विकास की आस में ठगी महसूस कर रही थी – फिर भी बीजेपी और सहयोगी दलों की झोली वोटों से भर गई। सवाल उठता है: ये जीत विकास की है, या ‘कुछ और’ की? विपक्ष चिल्ला रहा है – ‘सिस्टम में गड़बड़ी!’ लेकिन बीजेपी कहती है, ‘जनता का विश्वास!’ आइए, इस ‘चमत्कार’ को कटाक्ष की नजर से देखें।

विकास का ‘सबका साथ, सबका विकास’ – किसका किसका?

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया था: ‘सबका साथ, सबका विकास’। 11 साल बाद पूछिए – किसका विकास हुआ?

  • किसानों का? खाद-बीज महंगे, एमएसपी की गारंटी गायब।
  • युवाओं का? बिहार में जॉब्स की जगह ‘पकौड़ा तलने’ का सर्टिफिकेट।
  • महिलाओं का? गैस सिलेंडर 400 रुपये का वादा था, अब 1000 पार – उज्ज्वला योजना में ‘उजाला’ तो आया, लेकिन रसोई में अंधेरा!

बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक तो बधाई दे रहे हैं, लेकिन उनके क्षेत्र में एक ईंट तक नहीं लगी। फिर वोट कैसे? शायद ‘विकास’ अब ऐप पर हो रहा है – डिजिटल इंडिया में!

महंगाई चरम पर, मीडिया ‘मौन व्रत’ पर

पेट्रोल 100+, डीजल 90+, दाल 200 किलो – जनता की जेब खाली, लेकिन गोदी मीडिया की TRP फुल! प्रधानमंत्री से सवाल पूछने की हिम्मत? जी नहीं!

  • पूछते हैं: “सर, आप इतना कम क्यों सोते? थकते नहीं?”
  • या: “आपके क्लोज फ्रेंड कौन? आम कैसे काटते हैं?”
  • अभिनेता को बुलाओ: “मोदी जी, सेल्फी टिप्स दें!”

मीडिया के प्राइम टाइम में चर्चा— “कौन किसे मिला?”, “किसने किस पर ट्वीट किया?”, “कौन सा फिल्मी ड्रामा चल रहा है?”

महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार से जुड़े मूल सवाल मीडिया के कैमरे से बाहर कर दिए गए।

‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का क्या हुआ? VIP कल्चर खत्म? अब तो लालबत्ती वाली गाड़ियां और लंबी हो गईं। सिलेंडर-पेट्रोल के दाम कम? हा हा, वो तो 2014 का ‘जुमला’ था – अब ‘रियलिटी’ में महंगाई का ‘मेगा शो’!

मीडिया की ‘TRP तमाशा’: धमेंद्र को ‘मार’ डाला!

एक जमाना था जब पत्रकार सत्ता से टकराते थे। अब? TRP के लिए बॉलीवुड लेजेंड धर्मेंद्र को ‘मृत’ घोषित कर दिया – ब्रेकिंग न्यूज: “धर्मेंद्र नहीं रहे!” (बाद में सुधार: “ओप्स, जिंदा हैं!”)। जनता पूछती है: असली मुद्दों पर खामोश, फेक न्यूज पर होड़?

अगला चुनाव—जनता का आखिरी, सबसे शक्तिशाली हथियार

सरकार बदलने से पहले जनता को अपनी सोच बदलनी होगी।

  • विकास हो, तभी वोट दो।
  • काम हो, तभी समर्थन दो।
  • अन्यथा “विश्व गुरु” बनने का सपना
  • कहीं “जनता गुरु—सत्ता चेला” में न बदल जाए।

जनता जागो, वरना ‘नया अंग्रेजी राज’!

सत्ताधारी नेताओं को ‘भगवान’ मत बनने दो। विकास नहीं, तो वोट मत दो। नहीं तो कल को नेता कहेंगे: “हम शासन करेंगे, तुम चुप रहो – जैसे अंग्रेज करते थे!” जागो, वरना देर हो जाएगी। अगला चुनाव तुम्हारा हथियार है – इस्तेमाल करो, वरना ‘विश्व गुरु’ बनते-बनते ‘गुलाम’ हो जाओगे!(यह व्यंग्यपूर्ण रिपोर्ट वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी श्री अभिषेक वशिष्ठ द्वारा लिखित मूल लेख पर आधारित है। सत्ता और मीडिया से सवाल पूछना हमारा हक है – कटाक्ष जारी रहेगा!)

यह लेख वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड की आधिकारिक बौद्धिक संपत्ति है।

  • बिना अनुमति पुनर्प्रकाशन निषिद्ध।

अभिषेक वशिष्ठ (अध्यक्ष, वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड)

“सच कहना साहस है। चुप रहना समझौता।”

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