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Bihar Election 2025: राजनीतिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् योगेंद्र यादव ने बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन संशोधन (SIR) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यादव ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग 2003 के बिहार मतदाता सूची संशोधन की गाइडलाइन को तीन महीने से दबाकर बैठा था, जो SIR की प्रक्रिया के दावों का खंडन करती है।
यादव ने एक वीडियो में दावा किया कि 2003 में कोई सार्वजनिक फॉर्म नहीं भरे गए थे, न ही 21 दिनों की कोई समयसीमा थी। उन्होंने कहा कि उस समय BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर सत्यापन करते थे और 11 विकल्प दिए गए थे, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि सिर्फ चार विकल्प थे। इसके अलावा, 2003 में नागरिकता की जांच सिर्फ संदिग्ध मामलों में की गई थी, जबकि SIR में व्यापक दस्तावेज़ी सबूत मांगे जा रहे हैं।
इस खुलासे से SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रही चुनौती को और बल मिला है, जहां याचिकाकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि बिना नोटिस के लाखों वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर मतदाता अयोग्य ठहराए जा सकते हैं।
इस मुद्दे पर The Wire और The Hindu जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में भी चर्चा है, जहां SIR को चुनावी हेरफेर का उपकरण बताया जा रहा है। यादव का कहना है कि चुनाव आयोग का दावा कि SIR 2003 की प्रक्रिया को दोहरा रहा है, पूरी तरह से झूठा है।
बिहार में होने वाले चुनाव से पहले यह विवाद और गहराता जा रहा है, और विपक्षी दल चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं।
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