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जयपुर, राजस्थान (26 फ़रवरी 2026) — राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर ठगी के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पुलिस ने कई युवाओं को गिरफ़्तार किया है जो लोगों को धोखे में डालकर पैसों की ठगी कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि ठग गिरोह ने कॉलेज के छात्रों की आड़ में फर्जी वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन फ्रॉड के ज़रिये लोगों को नकली योजनाओं का झाँसा देकर ठगी की थी।
कैसे होता था फ्रॉड?
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने सोमनाथ ट्रस्ट, वृंदावन, काशी-नाथद्वारा समेत अन्य धार्मिक गेस्ट-हाउस-बुकिंग वेबसाइटों की फर्जी प्रतियां तैयार की थीं। लोग इन साइटों पर आने के बाद रूम बुकिंग या पूजा-डोनेशन के नाम पर भुगतान करते थे।
फिर:
- ज्यादा आकर्षक रसीदें और लोगो दिखाकर विश्वास दिलाया जाता था
- QR कोड, UPI और बैंक ट्रांसफर के ज़रिये पेमेण्ट करवाया जाता था
- भुगतान के बाद जब पीड़ित वास्तविक गेस्ट-हाउस पहुंचे तो वहाँ उनकी बुकिंग नहीं मिलती थी
इन तरीकों से कई लोगों को लगभग ₹48,000 तक की ठगी का सामना करना पड़ा — कुछ मामलों की रिपोर्ट के अनुसार यह रकम भी हो सकती है।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ
साइबर फ्रॉड के खिलाफ गुजरात पुलिस और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त जांच और टेक्निकल सर्विलांस से पता लगाया कि यह गिरोह कई महीनों से सक्रिय था। पुलिस ने कई युवकों को गिरफ्तार किया है जिनमें आरोप है कि वे तकनीकी रूप से ऐसे फ्रॉड ऑपरेशन चला रहे थे।
सावधान रहें — पुलिस ने चेताया
जयपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि:
- अंजानी वेबसाइटों पर बुकिंग/payment लिंक पर क्लिक न करें
- केवल भरोसेमंद और आधिकारिक साइटों से ही भुगतान करें
- संदिग्ध लेन-देन होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं
यह भी कहा गया है कि फर्जी विज्ञापन, QR कोड या नकली साइट लिंक से बड़ी ठगी हो सकती है।
📰 साइबर धोखाधड़ी का बढ़ता खतराः विशेषज्ञ का कहना
साइबर ठगी के तरीके जैसे नकली कॉल सेंटर्स, फर्जी निवेश योजना, और वेबसाइट फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल-टावर, गेस्ट-हाउस-रीज़र्वेशन या ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट जैसे धोखे अक्सर आधुनिक तकनीक और नकली दस्तावेज़ों के ज़रिये विश्वास जता कर किए जाते हैं।