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मुंबई, 13 मार्च 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार ने “महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026” (Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026) को शुक्रवार, 13 मार्च 2026, को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में जबरन, धोखे या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना बताया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कानून संविधान में दिए गए धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करते हुए अवैध धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के लिए बनाया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित कानून में कई सख्त नियम और दंड का प्रावधान रखा गया है।
- किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से 60 दिन पहले प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा।
- धर्म परिवर्तन के बाद 25 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना होगा।
- यदि धर्मांतरण जबरदस्ती, धोखे, प्रलोभन या विवाह के बहाने कराया गया पाया जाता है तो यह अपराध माना जाएगा।
- ऐसे मामलों में दोषी को 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
- नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति या कमजोर वर्ग के लोगों के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है।
- सामूहिक धर्मांतरण (दो या अधिक लोगों का एक साथ धर्म परिवर्तन) पर भी कठोर कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।
‘लव जिहाद’ और अवैध धर्मांतरण पर रोक का दावा
सरकार के अनुसार यह विधेयक विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन और कथित “लव जिहाद” जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भी लाया गया है। यदि किसी को शादी के बहाने धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता है तो इसे अपराध माना जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने चिंता भी जताई है। कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसे कानूनों से व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और निजी निर्णयों में सरकारी दखल बढ़ सकता है।
अन्य राज्यों में भी लागू हैं ऐसे कानून
अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां पहले से धर्मांतरण से संबंधित कानून लागू हैं, जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और उत्तराखंड।
आगे की प्रक्रिया
विधानसभा में पेश किए जाने के बाद विधेयक पर चर्चा होगी। दोनों सदनों से पारित होने और राज्यपाल तथा राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून लागू हो सकेगा।