28 फ़रवरी 2026
दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा प्रस्तावित अरविंद केजरीवाल की रैली की अनुमति रद्द कर दी है, जिससे राजधानी में राजनीतिक विवाद एक बार फिर बढ़ गया है। अनुमति अचानक वापस लिए जाने के बाद पार्टी नेताओं और प्रशासन के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला है।
पुलिस ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाली रैली के लिए दी गई अनुमति को रद्द कर दिया, जिससे कार्यक्रम को अंतिम समय पर स्थगित करना पड़ा। पार्टी सूत्रों ने बताया कि आयोजन से पहले ही सभी आवश्यक औपचारिकताएं प्रशासन को सूचित कर दी गई थीं, बावजूद इसके अनुमति वापस ले ली गई। इससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी फैल गई है।
AAP की प्रतिक्रिया — लोकतंत्र पर हमला?
AAP के नेताओं का कहना है कि प्रशासन का यह कदम राजनीति-प्रेरित है। पार्टी का दावा है कि यह अभिव्यक्ति की आज़ादी और संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध है, और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि जब पहले ही रैली की जानकारी दे दी गई थी, तो अंतिम समय में अनुमति वापस लेना उचित नहीं है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर अपने विचार साझा किए हैं, जिसमें उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और राजनीतिक माहौल में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
प्रशासन का रुख और कानून-व्यवस्था का हवाला
हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से इस कदम के पीछे कोर्ट के आदेश या विशेष निर्देशों का अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस वजह से राजनीतिक विश्लेषक इस मामले में प्रशासन और विरोधी दलों के बीच बड़ी बहस की संभावना जताते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण रैलियों का सम्मान किया जाना चाहिए, फिर भी कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के आधार पर प्रशासन को भी अपनी चिंता व्यक्त करने का अधिकार है। इससे जुड़े का