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यह हमला मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर ले गया है, जहां हूतियों ने ईरान के समर्थन में पहली बार सीधा हमला बोला।
हमले का विवरण
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 28 मार्च 2026 को इजरायल के दक्षिणी हिस्से में स्थित “संवेदनशील सैन्य ठिकानों” को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की।
हूती प्रवक्ता यह्या सरी ने अल-मसीरा टीवी पर बयान जारी कर इसे “पहली सैन्य कार्रवाई” बताया, जो ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह के समर्थन में की गई।
इजरायल के बेर्शेबा शहर और उसके आसपास सायरन बज उठे, लेकिन IDF ने मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया, कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ।
यह घटना फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के दूसरे महीने में हुई, जब हूतियों ने लाल सागर में शिपिंग पर पहले से खतरा बढ़ा रखा था।
पृष्ठभूमि और कारण
ईरान-इजरायल संघर्ष फरवरी के अंत में इजरायल के ईरानी ठिकानों पर हमलों से भड़का, जो अब डेढ़ महीने से जारी है।
हूतियों ने इसे “क्षेत्रीय आक्रामकता” का जवाब बताया और चेतावनी दी कि हमले जारी रहेंगे जब तक “हमले बंद न हों”।
यह हमला 24 घंटे के अंदर दूसरा था, जो हूतियों को जंग में औपचारिक रूप से एंट्री देता है।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
इजरायली सेना ने अमेरिका के साथ समन्वय में काम करने की बात कही, जबकि हूतियों के प्रवेश से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में शिपिंग पर नया खतरा मंडरा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है, खासकर सूएज नहर मार्ग पर।
हूती नेतृत्व ने कहा कि यह ईरान के बचाव में है, जिससे मध्य पूर्व में नया मोर्चा खुल गया।
आगे की संभावनाएं
यह घटना संघर्ष को यमन तक फैला सकती है, जहां पहले से सना पर इजरायली हमले हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है, क्योंकि इससे गाजा, लेबनान और सीरिया के मोर्चों के साथ जंग और जटिल हो गई।