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7 मार्च 2026
मिडिल-ईस्ट में युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इस संघर्ष के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और कई देशों की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई हैं।
अमेरिका-इजरायल के हमले से शुरू हुआ बड़ा सैन्य टकराव
रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में तेहरान समेत कई शहरों में मिसाइल साइट, सैन्य ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्थानों को निशाना बनाया गया।
इन हमलों के बाद संघर्ष तेजी से बढ़ गया और कई स्थानों पर भारी तबाही की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस सैन्य अभियान के बाद सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों के हताहत होने की आशंका जताई गई है।
ईरान का जवाब: मिसाइल और ड्रोन हमले
हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन दागे। ये हमले केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहे बल्कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई स्थानों पर एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को रोक दिया, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान और घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक चिंता
इस संघर्ष के कारण पूरे मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने कहा है कि नागरिकों पर किसी भी तरह के हमले का जवाब दिया जाएगा, जबकि कई देश युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।
इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के ड्रोन हमलों से निपटने के लिए नए एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात करने की योजना भी बनाई है।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मिडिल-ईस्ट में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।