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मुम्बई

खाकी पर दाग: आधी रात को मदद मांगने आईं महिलाओं पर भड़के मालवणी पुलिस के PSI प्रफुल, क्या मुंबई पुलिस कमिश्नर करेंगे सस्पेंड?

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मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): “सदासरक्षणाय खलनिग्रहणाय” (सज्जनों की रक्षा और दुष्टों का विनाश) का नारा देने वाली मुंबई पुलिस की साख पर मालवणी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने गहरा बट्टा लगा दिया है। मुंबई पुलिस खुद को महिलाओं की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात बताती है, लेकिन मालवणी पुलिस चौकी में तैनात PSI प्रफुल का संवेदनहीन रवैया यह साबित करने के लिए काफी है कि कुछ अधिकारियों की वजह से पूरी खाकी वर्दी शर्मसार हो रही है। ताजा मामला 3 जून 2026 की आधी रात का है, जिसने पुलिस प्रशासन के संवेदनहीन चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है।

रात 2 बजे सुरक्षा की उम्मीद लेकर पहुंची महिलाओं से दुर्व्यवहार

घटनाक्रम के अनुसार, 3 जून की देर रात करीब 2 बजे एक स्थानीय सोसाइटी की दो महिलाएं बेहद डरी और परेशान हालत में मालवणी पुलिस चौकी पहुंची थीं। रात के उस सन्नाटे में खुद को असुरक्षित पाकर वे कानून की शरण में आई थीं। महिलाओं ने वहां ड्यूटी पर मौजूद PSI प्रफुल से एक एनसी (NC – गैर-संज्ञेय अपराध) दर्ज करने की गुहार लगाई।

लेकिन, पीड़ित महिलाओं को ढांढस बंधाने और उनकी मदद करने के बजाय, अधिकारी प्रफुल अपने पद की हनक दिखाने लगे। उन्होंने शिकायत दर्ज करने में साफ तौर पर आनाकानी शुरू कर दी और महिलाओं को ही परेशान करना शुरू कर दिया। जब पानी सिर से ऊपर चला गया और पीड़ित महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि “अगर आपको शिकायत दर्ज नहीं करनी है, तो साफ मना कर दीजिए…”, तब कहीं जाकर प्रशासनिक दबाव के डर से PSI प्रफुल ने भारी मन से NC दर्ज की।

बड़ा सवाल: रक्षक ही डराने लगें तो महिलाएं कहाँ जाएं?

यह घटना मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर रात के 2 बजे समाज की जागरूक और संभ्रांत महिलाओं को पुलिस चौकी के भीतर ऐसा अपमानजनक और मानसिक आघात पहुंचाने वाला रवैया झेलना पड़ रहा है, तो इलाके की किसी गरीब, अनपढ़ या लाचार महिला के साथ यह अधिकारी कैसा बर्ताव करते होंगे? क्या उन्हें चौकी की दहलीज से ही धक्के मारकर भगा दिया जाता है?

‘संसद वाणी’ का खुलासा: लापरवाही का पुराना इतिहास, फिर भी कार्रवाई नहीं!

‘संसद वाणी’ की खोजी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि PSI प्रफुल का यह अड़ियल और संवेदनहीन रवैया कोई पहली बार नहीं देखा गया है। इससे पहले भी एक आम नागरिक की मामूली एनसी (NC) दर्ज करने में इस अधिकारी ने अपनी लापरवाही के चलते पूरे 3 महीने का समय लगा दिया था। पुरानी गलतियों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पर्दा डाले जाने का ही नतीजा है कि इस अधिकारी के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे आधी रात को मदद मांगने आ रही महिलाओं को भी प्रताड़ित करने से बाज नहीं आ रहे।

अब देखना यह है कि कानून का पाठ पढ़ाने वाले इस अधिकारी पर मुंबई पुलिस के आला अधिकारी क्या कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि PSI प्रफुल पर निलंबन (Suspension) जैसी बड़ी कार्रवाई चाहती है।

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