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लगातार चेतावनियों के बाद भी सोया रहा कांदिवली ट्रैफिक विभाग; पूरी रात सड़क घेरकर खड़े रहते हैं ट्रक, आखिर अधिकारियों को शर्म क्यों नहीं आती?

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२५ हजार नागरिकों की सुरक्षा को ठेंगा: लगातार खबरों के बाद भी कांदिवली ट्रैफिक चौकी के अधिकारियों को नहीं आई शर्म, रात के अंधेरे में सड़कों पर सज रहा है भारी वाहनों का मेला।

ब्यूरो, मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) के एकता नगर स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के २५ हजार नागरिकों के ‘जीने के अधिकार’ (अनुच्छेद 21) और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने में कांदिवली ट्रैफिक विभाग ने बेशर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार साक्ष्यों के साथ खुलासे किए जाने के बावजूद, लापरवाह अफ़सरों की सेहत पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा है। प्रशासन की इस घोर संवेदनहीनता के खिलाफ जनता में अब भारी आक्रोश व्याप्त है।

दिन तो दूर, अब पूरी रात सड़क को बंधक बनाने का खुला खेल!

‘वशिष्ठ वाणी’ की खोजी टीम द्वारा की गई ताज़ा ग्राउंड रिपोर्टिंग में एक और खौफनाक सच सामने आया है। भारत गैस के सिलेंडरों से भरे ये भारी और ज्वलनशील वाहन केवल दिन में ही नहीं, बल्कि पूरी-पूरी रात इसी मुख्य सड़क पर अवैध रूप से कतार बनाकर खड़े रहते हैं। रिहायशी इलाके की मुख्य सड़क को नियमों के खिलाफ जाकर रात का स्थायी गैराज और पार्किंग हब बना दिया गया है।

सवाल यह उठता है कि क्या कांदिवली ट्रैफिक चौकी के नाइट पेट्रोलिंग (रात की गश्त) करने वाले अधिकारियों को रात के अंधेरे में सड़क पर खड़ी ये दर्जनों भारी गाड़ियां दिखाई नहीं देतीं? या फिर जानबूझकर रात के सन्नाटे में इस अवैध पार्किंग सिंडिकेट को खुली छूट दी गई है?

आम जनता पर तुरंत कार्रवाई, रसूखदारों के आगे नतमस्तक खाकी!

स्थानीय निवासी आज सीधे तौर पर कांदिवली ट्रैफिक विभाग की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं। अगर कोई आम नागरिक अपनी गाड़ी भूलवश भी थोड़ी देर के लिए सड़क किनारे खड़ी कर दे, तो ट्रैफिक पुलिस की क्रेन तुरंत पहुंच जाती है और भारी-भरकम जुर्माना वसूलने में एक मिनट की भी देरी नहीं की जाती। लेकिन जब २५ हजार लोगों की आबादी के बीच, म्हाडा की रिहायशी सड़कों पर पूरी रात भारत गैस के भारी ट्रक अवैध रूप से खड़े रहते हैं, तो कांदिवली ट्रैफिक पुलिस का कानून और क्रेन दोनों गायब हो जाते हैं। यह दोहरी नीति साफ इशारा करती है कि इस महा-लापरवाही के पीछे कोई बहुत बड़ा प्रशासनिक घालमेल चल रहा है।

‘वशिष्ठ वाणी’ का अंतिम अल्टीमेटम: अब सीधे कोर्ट में खिंचेगी अफ़सरशाही!

लगातार तीन दिनों तक सबूत देने के बाद भी अगर प्रशासन सोया हुआ है, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ अब इस मामले को स्थानीय स्तर पर बिल्कुल नहीं छोड़ेगी। हमारे पास दिन और रात की अवैध पार्किंग के पुख्ता वीडियो और ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेज़ मौजूद हैं।

हमारी लीगल टीम इन सभी लाइव सुबूतों को संकलित करके सीधे मुंबई पुलिस कमिश्नर, लोकायुक्त और माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट में ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) और जनहित याचिका के तहत मामला दर्ज कराने जा रही है। जनता की जान को जोखिम में डालकर मलाईदार कुर्सियों पर बैठने वाले इन लापरवाह अफ़सरों की जवाबदेही अब सीधे कानूनी कटघरे में तय होगी।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट पूर्णतः सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात सुगमता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई एक तथ्यात्मक खोजी रिपोर्ट है। ‘संसद वाणी’ का उद्देश्य जनहित में कानून का पालन सुनिश्चित करवाना है।

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