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लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण: राम मंदिर SV रोड पर ‘विकास’ के नाम पर जनता की दुर्दशा

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मुंबई: राम मंदिर SV रोड पर पिछले दो महीनों से खोदा गया गड्ढा अब प्रशासन की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा स्मारक बन गया है। महीनों तक इस गड्ढे ने राहगीरों की जान जोखिम में डाली, और जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस मुद्दे पर जनता की आवाज उठाई, तब कहीं जाकर प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटी और कछुए की गति से काम शुरू हुआ।

लेकिन हैरानी तो तब हुई जब गड्ढा भरने के बाद आज की स्थिति देखी गई। मरम्मत के नाम पर लीपा-पोती का ऐसा खेल खेला गया है कि गड्ढा भरते ही सड़क अब ‘डेथ ट्रैप’ में बदल गई है। पहली ही बारिश में यह तथाकथित ‘मरम्मत’ धराशायी हो गई और सड़क फिर से जलमग्न हो गई।

सवाल यह है कि क्या यह महज प्रशासनिक विफलता है या भ्रष्टाचार का वह स्याह चेहरा, जहाँ सड़क बनाने के लिए आवंटित बजट जनता की सुरक्षा के बजाय अधिकारियों की जेब में चला गया? दो महीने तक गड्ढा खुला छोड़ना लापरवाही थी, लेकिन उसे ‘अनदेखी’ तरीके से भर देना, जनता की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।

क्या मुंबई का करदाता इसी दिन के लिए टैक्स देता है? प्रशासन का हर दावा—चाहे वह मानसून-पूर्व तैयारी का हो या सड़कों की मरम्मत का—सब कागजी साबित हुआ है। मुंबई की जनता अब जवाब चाहती है: आखिर कब तक ये जिम्मेदार अधिकारी अपनी इस ‘लापरवाह व्यवस्था’ के लिए जनता को बलि का बकरा बनाते रहेंगे?

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