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मेक्सिको में खूनी चुनाव हो रहा है. अगले महीने होने वाले आम चुनाव से पहले कई उम्मीदवारों की हत्या कर दी गई है. उन्हें धमकाया जा रहा है. ड्रग्स कार्टेल्स इन चुनाव में अपना दबदबा चाहते हैं.
मेक्सिको में आम चुनाव होने वाला है. इससे पहले वहां खूनी खेल चल रहा है. चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की हत्या की जा रही है. एक कैंडिडेट को उस समय कई गोलियां मारी गई जब वे जीम में वर्कआउट कर रहे थे. ऐसे ही एक कैंडिडट को चुनावी कैंपने के दौरान गाली मारी गई. पूरे मेक्सिको में दर्जनों उम्मीदवारों, उनके परिवार और पार्टी के कार्यकर्ता को टारगेट किया गया.
मेक्सिको में अगले महीने आम चुनाव होना है. ये देश का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण चुनाव है. लगभग 36 उम्मीदवार पिछले जून से अब तक मारे गए हैं. देशभर में कई उम्मीदवारों की हत्याएं हुई हैं. उन्हें धमकाया जा रहा है क्योंकि देश के ताकतवर ड्रग्स कार्टेल्स इन चुनाव में अपना दबदबा चाहते हैं.
चुनावी हिंसा इतनी बुरी क्यों है?
सुरक्षा विश्लेषकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के अनुसार, मेक्सिको में हिंसा में वृद्धि का मुख्य कारण स्थानीय आपराधिक समूह हो सकते हैं. मेक्सिको के बड़े संगठित अपराध सिंडिकेट टूटे हैं, जिसके कारण कई नई गिरोह का जन्म हुआ है. ये अपने प्रभुत्व में और इलाके में नियंत्रन के लिए इस खूनी खेला का सहारा ले रहे हैं. मेक्सिको में चुनाव के दौरान हिंसा कोई नई बात नहीं है. मेक्सिको सिटी के एक विश्वविद्यालय, कॉलेज ऑफ मेक्सिको द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पिछले चुनाव में,जब देश भर के मतदाताओं ने 19,900 से अधिक स्थानीय पदों के लिए मतदान किया, तो कम से कम 32 उम्मीदवार मारे गए थे.
बढ़ती हिंसा को कुछ हद तक चुनाव के पैमाने और उम्मीदवारों की विशाल संख्या के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. 20,000 से अधिक स्थानीय पदों और संघीय स्तर पर 600 से अधिक पदों के साथ, इस साल का चुनाव मेक्सिको के इतिहास में सबसे बड़ा है.
उम्मीदवारों की हत्या क्यों की जा रही है?
ऐसा क्यों हो रहा है इसका सटीक जवाब दे पाना मुश्किल है, लेकिन जानकारों का कहना है कि कई हत्याएं अनसुलझी हुई हैं. अधिकारियों का कहना है कि कुछ हत्याएं अधिक आपराधिक या व्यक्तिगत प्रकृति की थीं. लोकल लेवल पर सबसे ज्यादा हिंसा हो रही है क्योंकि यहां ड्रग्स कार्टेल्स समुह ज्यादा मजबूत हैं. इलेक्टोरल लेबोरेटरी के निदेशक आर्टुरो एस्पिनोसा ने कहा अब तक है पूरे देश में चुनावी हिंसा के 272 मामले दर्ज किए गए – जिनमें हत्याएं, धमकियां, अपहरण और हमले शामिल हैं.
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