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नीतीश कुमार के पास अपनी बातों को मनवाने का एक शानदार मौका है. वहीं भाजपा को सरकार बनाने और सरकार को 5 सालों तक चलाने के लिए उनकी बातों को हर हाल में मानना ही होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है. हालांकि पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में इस बार उसे अपने सहयोगी दलों पर निर्भर रहना होगा. एनडीए की सरकार बनाने में जेडीयू के नीतीश कुमार और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की अहम भूमिका होने जा रही है. इन दोनों के सहयोग के बिना भाजपा का सरकार बना पाना लगभग असंभव है.
नीतीश कुमार के साथ अपनी शर्त मनवाने का शानदार मौका
ऐसे में नीतीश कुमार के पास अपनी बातों को मनवाने का एक शानदार मौका है. वहीं भाजपा को सरकार बनाने और सरकार को 5 सालों तक चलाने के लिए उनकी बातों को हर हाल में मानना ही होगा.
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम नीतीश कुमार के लिए एक प्रमुख मुद्दा रहा है. सूत्रों की मानें तो नीतीश भाजपा के सामने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम लागू करने की शर्त रख सकते हैं. हालांकि यह मांग भाजपा के लिए एक झटका साबित हो सकती है और यूसीसी और एनआसी जैसे एजेंडे को लागू करने में बाधा बन सकती है.
आखिर क्या है यह कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (CMP)? आइए जानते हैं…
CMP एक ऐसा दस्तावेज है जो गठबंधन सरकार या गठबंधन की नीति, प्राथमिकताओं और साझा एजेंडे को रेखांकित करता है. यह सरकार के कामकाज के लिए एक रूपरेखा के रूप में काम करता है और सुनिश्चित करता है कि सभी भाग लेने वाले दलों को उन प्रमुख मुद्दों और लक्ष्यों की समझ हो जिन्हें वे एक साथ संबोधित करना चाहते हैं.
कौन-कौनसे मंत्रालय मांग सकते हैं चिराग पासवान और नीतीश
न्यूज18 के सूत्रों के मुताबिक, दोनों रेल मंत्रालय और ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय की मांग कर सकते हैं. गौरतलब है कि 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी हुए थे जिसमें भाजपा नीत एनडीए को 292 सीटें मिली हैं, जोकि बहुमत के आंकड़े 272 से ज्यादा हैं.
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