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राजनीति

10 साल बाद लोकसभा को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष, बड़ा ही पावरफुल है यह पद

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Leader Of The Opposition In Lok Sabha: 10 साल बाद लोकसभा को नेता प्रतिपक्ष मिलने वाला है. पिछले 10 सालों से कोई भी पार्टी इस पद के लिए निर्धारित सीटें नहीं जीत पा रहीं थी. इस बार कांग्रेस ने 99 सीटें जीती हैं.

Leader Of The Opposition In Lok Sabha: 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव संपन्न हो गए हैं. चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. एनडीए गठबंधन ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है. तीसरी बार पीएम मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. इस बार के चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि लोकसभा को नेता प्रतिपक्ष भी मिलेगा. इससे पहले कि 16वीं और 17वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा किसी को नहीं मिला था. क्योंकि उस पद को पाने के लिए कोई भी पार्टी चुनाव में निर्धारित सीटें नहीं जीत पाई थी. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए क्या नियम कानून हैं और नेता प्रतिपक्ष कितना पावरफुल होता है.

18वीं लोकसभा में कांग्रेस के संसदीय दल के नेता को  नेता प्रतिपक्ष का पद मिलेगा. इस बार कांग्रेस के खाते में 99 सीटें आई हैं. उसने नेता प्रतिपक्ष पदों के लिए निर्धारित सीटों के आंकड़े को पार कर लिया है. 10 साल बाद लोकसभा को नेता प्रतिपक्ष मिलेगा. कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने राहुल गांधी के नाम पर मुहर लगा दी है. 

किस पार्टी को मिलता है नेता प्रतिपक्ष का पद?

लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के संसदीय दल के नेता को विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष के रूप में चुना जाता है. लोकसभा में नेता विपक्ष का पद उस पार्टी को दिया जाता है जिसे लोकसभा चुनाव में कुल सीटों की कम से कम 10 फीसदी सीटें मिली हों. 543 सीटों में अगर किसी पार्टी को 55 सीटें मिल जाती हैं तो उस पार्टी को नेता प्रतिपक्ष का पद मिलता है. एक से ज्यादा पार्टी को कुल सीटों की 10 फीसदी से ज्यादा सीटें मिलती है तो सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली पार्टी को नेता प्रतिपक्ष का पद दिया जाता है.

संविधान में नहीं है नेता प्रतिपक्ष का उल्लेख   

भारतीय संविधान में लोकसभा के लिए विपक्ष के नेता का उल्लेख नहीं है. नेता प्रतिपक्ष का उल्लेख संसदीय संविधि में है. साल 1952 के पहले आम चुनाव में कुल सीटों का 10 फीसदी सीट पाने वाली पार्टी को नेता विपक्ष का पद दिए जाने का नियम आया था. उस समय के तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर ने नेता विपक्ष के लिए ये नियम बनाया था. आगे चलकर 1977 में नेता प्रतिपक्ष के लिए वेतन भत्ता कानून भी बनाया गया. इस कानून में ये कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष उसे माना जाएगा जिस विपक्षी दल को लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिली होंगी.

कितना पावरफुल होता है नेता प्रतिपक्ष?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सभी प्रमुख दलों की मांगों से लेकर हर एक मुद्दे पर बहस करता है. नेता प्रतिपक्ष कई संसदीय समितियों का सदस्य होता है. वह सिलेक्शन कमिटी का भी सदस्य होता है. सीबीआई डायरेक्टर, ईडी,  लोकपाल और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष की भी अहम भूमिका होती है. उसे भी इन प्रमुख पदों के चुनाव में वोट देने का अधिकार होता है. इन सबके साथ ही नेता प्रतिपक्ष  केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय सूचना आयोग जैसे वैधानिक निकायों के प्रमुख को चुनने वाली समिति का भी सदस्य होता है.    

कैबिनेट मंत्री के बराबर होता है नेता प्रतिपक्ष 

नेता प्रतिपक्ष को एक कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा दिया जाता है. नेता प्रतिपक्ष का पद काफी अहम होता है. कैबिनेट मंत्री को मिलने वाली हर एक सुविधा सदन के नेता प्रतिपक्ष को मिलती है. देश से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर नेता प्रतिपक्ष प्रधानमंत्री के साथ बैठक भी करता है.   

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