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Dasanglu Pul: अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एकतरफा जीत मिली थी. 60 में 46 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने सरकार बना ली है. पेमा खांडू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. उनके साथ उनके कैबिनेट मंत्रियों ने भी शपथ ली. इस बार उनकी कैबिनेट में एक महिला विधायक भी शामिल हैं. अरुणाचल प्रदेश के 20 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी महिला को मंत्री बनाया गाय है. महिला मंत्री का नाम दासंगलू पुल है.
Dasanglu Pul: अरुणाचल प्रदेश में नई सरकार का गठन हो गया है. 13 जून को पेमा खांडू ने लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ उनके मंत्रियों ने भी शपथ ली. अरुणाचल के 20 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को मंत्री बनाया गया है. सीएम पेमा खांडू के साथ महिला विधायक ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. इस महिला विधायक का नाम दासंगलू पुल. अरुणाचल प्रदेश के मंत्रिमंडल के 20 साल के इतिहास में शामिल होने वाली वह पहली महिला हैं. उनके साथ बियुराम वाघा, न्यातो दुकम, गणरील डेनवांग वांगसू, वानकी लोवांग, पासंग दोरजी सोना, मामा नटुंग, बालो राजा, केंटो जिनी और ओजिंग तासिंग ने भी मंत्री पद की शपथ ली.
दासंगलू पुल बीजेपी की टिकट पर हयुलियांग सीट से चुनावी मैदान में थीं. उन्होंने चुनाव में निर्विरोध जीत दर्ज की थी. आइए जानते हैं कि आखिर अरुणाचल प्रदेश की महिला मंत्री दासंबलू कौन हैं.
कौन हैं दासंगलू पुल?
20 साल में पहली बार अरुणाचल में पहली बार महिला कैबिनेट मंत्री बनीं दासंगलू पुल हयुलियांग विधानसभा सीट से निर्वोरोध चुनी गई थी. उनके सामने कोई प्रत्याशी ही नहीं खड़ा हुआ था.
साल 2016 के विधानसभा चुनाव में दासंगलू पुल पहली बार चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं. वह सीएम पेमा खांडू की कैबिनेट में शामिल होने वाली पहली महिला हैं. पेमा खांडू के पिछले दो कार्यकाल में कोई भी महिला उनके कैबिनेट में शामिल नहीं थी.
पूर्व सीएम की पत्नी हैं दासंगलू पुल
41 साल की दासंगलू पुल अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल की पत्नी हैं. उनके पास 6 करोड़ से अधिक रुपये की संपत्ति है. दासंगलू पुल के पास कई महंगी गाड़ियां है. चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास फोर्ड एंडेवर, टाटा सफारी और स्कॉर्पियों जैसी फोर व्हीलर गाड़ियां हैं.
हाई कोर्ट ने अमान्य घोषित कर दी थी जीत
साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी जीत विवादों में थी. दरअसल, 2023 में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के चलते उनकी जीत को अमान्य घोषित कर दिया था. उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने अपने दिवंगत पति की संपत्ति के बारे में चुनावी हलफनामे में खुलासा नहीं किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था.
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