Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
मनाली, हिमाचल प्रदेश (28 अक्टूबर 2025): हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियां एक बार फिर एक दिल दहला देने वाली घटना की गवाह बनीं। मनाली के पास सेवन सिस्टर पीक की लगभग 13,500 फीट ऊंची, दुर्गम बर्फीली पहाड़ियों में एक 51 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई पैराग्लाइडर पायलट, जिसका नाम एंडी बताया गया है, सोमवार शाम को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हवा के अचानक बदले रुख और क्रूर ठंड के बीच वह लगभग 20 घंटों तक जिंदगी और मौत के बीच फंसा रहा।
हादसा और उम्मीद की एक किरण
यह हादसा सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 की शाम उस वक्त हुआ जब अनुभवी पायलट एंडी बीर बिलिंग से मनाली की ओर उड़ान भरकर वापस लौट रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि अप्रत्याशित रूप से बढ़े हवा के दबाव और मौसम की मार के कारण उनका पैराग्लाइडर अनियंत्रित हो गया और सेवन सिस्टर पीक रेंज की एक संकरी, खतरनाक चट्टानी कगार पर क्रैश लैंड हो गया।
इस मुश्किल घड़ी में, उनके साथ उड़ान भर रहे एक साथी पायलट की सतर्कता ने उम्मीद की एक हल्की किरण जगाई। उन्होंने तुरंत दुर्घटना की सूचना स्थानीय बचाव दल को दी, जिसके बाद अंधेरे में ही एक बेहद जोखिम भरा बचाव अभियान शुरू हुआ।
20 घंटे की यातना और भयानक रात
रात का अंधेरा, शून्य से नीचे गिरता तापमान और खतरनाक चट्टानें… बचाव दल के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। रात भर बचाव टीम दुर्गम रास्तों पर आगे बढ़ती रही, लेकिन घना अंधेरा और जानलेवा इलाका उन्हें एंडी तक पहुँचने नहीं दे सका।
उधर, एंडी चट्टान की एक संकरी पट्टी पर फंसे थे। 20 घंटे तक उन्होंने कड़ाके की ठंड, अकेलेपन और चोट के दर्द से लड़ते हुए हर पल मौत का सामना किया। इस बीच, कब सुबह होगी और कब मदद आएगी, इसी एक सवाल के साथ उनके लिए हर गुजरता पल एक यातना बन गया।
मंगलवार सुबह हुआ सफल रेस्क्यू
मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 की सुबह, आखिरकार भारतीय वायुसेना की मदद से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घंटों की जद्दोजहद के बाद, हेलीकॉप्टर एक संकरी जगह पर पहुँचने में कामयाब रहा और पायलट एंडी को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।
एंडी को तुरंत मनाली के मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह खतरे से बाहर हैं, लेकिन 20 घंटे की भयानक रात के निशान उनके शरीर और मन पर गहरे हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रोमांचक एडवेंचर स्पोर्ट्स में एक छोटी सी चूक भी हिमालय की बर्फीली वादियों में कितना बड़ा जोखिम बन सकती है। यह केवल एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि प्रकृति की क्रूरता के सामने मानव साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक मार्मिक कहानी है।