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महंगा पड़ा भालू का मांस, दिमाग़ में पड गए किडे, जानवरों जैसी हरकत करने लगा परिवार

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Brain Worm Infection: अमेरिका के एक परिवार को भालू का अधपका मांस खाना महंगा पड़ गया. परिवार के छह सदस्य ब्रेन वॉर्म्स के शिकार हो गए. उनके दिमाग में कीड़े पनप गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

 एक परिवार के कुछ सदस्य पिछले कुछ महीने से दिमाग में होने वाली हलचल से परेशान थे. इनमें से कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जांच पड़ताल के बाद पता चला कि परिवार के कुछ सदस्यों के दिमाग में कीड़े पनप गए हैं. कुछ कीड़ों ने तो दिमाग में अंडे भी दे दिए हैं. मामले की जानकारी के बाद डॉक्टर भी आश्चर्य में पड़ गए. जब पीड़ितों से पूछताछ की गई तो उन्होंने कुछ महीने पहले भालू का मांस खाना स्वीकार किया. मामला अमेरिका का है. बुखार, मांसपेशियों में गंभीर दर्द और आंखों के आसपास सूजन से पीड़ित तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

कहा जा रहा है कि दिमाग में पनपे कीड़ों के हलचल के बाद पीड़ित जानवरों जैसा व्यवहार करने लगते थे. उनके सिर में असहनीय दर्द होने लगता था. जुलाई 2022 में मिनेसोटा हेल्थ डिपार्टमेंट को जानकारी मिली थी कि 29 साल का एक शख्स पिछले 15 से 17 दिनों में कई बार अस्पताल का चक्कर काट चुका है. शख्स को बुखार था, मांसपेशियों में दर्द था और आंखों के आसपास सूजन भी था. डॉक्टरों ने पड़ताल के बाद जब मरीज से पूछताछ की तब पता चला कि वो साउथ डकोटा में एक फैमिली फंक्शन में शामिल हुआ था. वहां उसने भालू के मांस का कबाब खाया था. उसने बताया कि कनाडा के सस्केचवान में रहने वाले एक परिवार ने फंक्शन का आयोजन किया था. 

जांच पड़ताल के बाद पता चला कि शख्स ने भालू के मांस का जो कबाब खाया था, उस मांस को पकाने से पहले डेढ़ महीने तक डीप फ्रीजर में रखा गया था. रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, शुरुआत में मांस अधपका था. इसके बाद उसे दोबारा भी पकाया गया. पीड़ित शख्स के अलावा, मेजबानी करने वाले परिवार के लोगों ने भी कबाब खाया था. इनमें से कुछ लोग मिनेसोटा के थे, जबकि कुछ लोग साउथ डकोटा और एरिजोना के रहने वाले थे. 

पूरे मामले की जानकारी के बाद एक बार फिर से डॉक्टरों ने जांच पड़ताल की. उन्होंने पाया कि जिन लोगों ने भालू का मांस खाया था, उनमें से अधिकतर ट्राइचिनेलोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित हैं, जो आम तौर पर जंगली जानवरों के मांस के खाने से फैलता है. पीड़ित शख्स के शरीर में ट्राइचिनेलोसिस का लार्वा मांसपेशियों से होते हुए दिमाग तक पहुंच जाता है. 

एक बार मानव मेज़बान में प्रवेश करने के बाद, लार्वा शरीर से होकर मांसपेशियों के ऊतकों और मस्तिष्क सहित अन्य अंगों तक पहुंच सकता है. जिस परिवार ने फैमिली फंक्शन का आयोजन किया था, उस परिवार के भी पांच लोगों के दिमाग में कीड़ों के पनपने की जानकारी मिली. 

ऐसे किया गया पीड़िता का इलाज

जानकारी के मुताबिक, ट्राइचिनेलोसिस से पीड़ित मरीजों का एल्बेंडाजोल से इलाज किया गया. मेयो क्लिनिक के अनुसार, ये दवा वॉर्म्स को बढ़ने से रोकती है, जिससे वे मर जाते हैं. बताया गया कि ट्राइचिनेला पारासाइट्स को खत्म करने का एकमात्र तरीका मांस को कम से कम 74 डिग्री सेल्सियस पर पकाकर खाना है.

 डेढ़ महीने तक डीप फ्रीजर में रखा था भालू का मांस

मिनेसोटा हेल्ड डिपार्टमेंट स्वास्थ्य विभाग को 2022 में सबसे पहले एक आदमी में लक्षण होने की बात पता लगी थी। 29 साल का ये आदमी लगातार बुखार, मांसपेशियों में दर्द और आंखों के पास सूजन आदि समस्याओं से ग्रस्त था। जिसको काफी कम समय में ही इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जिसके बाद पता लगा कि इसने फैमिली के साथ साउथ डकोट में एक समारोह में शिरकत की थी। यहां उत्तरी सस्केचेवान से पकड़े गए भालू के मांस से बने कबाब इस परिवार ने खाए थे।

सीडीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि मांस पूरी तरह पिघला नहीं था। इससे पहले ही इसे डीप फ्रीजर में रखा गया था। शुरू में परिवार ने कुछ मांस खाया, लेकिन बाद में पता लगा कि यह पूरी तरह पका हुआ नहीं है। जिसके बाद दोबारा पकाया गया और 6 लोगों ने इसे खाया। 29 साल के व्यक्ति में ट्राइचिनेलोसिस नामक एक दुर्लभ प्रकार के राउंडवॉर्म के लक्षण डॉक्टरों को मिले थे। यह बीमारी जंगली जानवरों का मांस खाने से होती है। बाद में इसके कीड़े मस्तिष्क तक पहुंच गए।

क्या कहते हैं चिकित्सक

डॉ. सेलीन गौंडर ने बताया कि अगर सिरदर्द, उल्टी, मतली और दौरों की शिकायत है, तो ब्रेन वॉर्म हो सकता है। हो सकता है कि इस बीमारी का लक्षण दिखे भी नहीं। यह बीमारी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इफेक्ट करती है। जिनको कैल्सीफाइड शेल में बदल देती है। मांस को कम से कम 165 डिग्री फारेनहाइट पर पकाया जाए, तो इस बीमारी की आशंका नहीं होती। अन्य खाद्य पदार्थों से भी ये बीमारी हो सकती है। जिसके इलाज के लिए एल्बेंडाजोल नामक दवा कारगर है। जिससे कीड़ों को नष्ट किया जाता है।

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