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इंदौर | 3 जनवरी 2026
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित और जहरीले पानी की आपूर्ति से हुई मौतों के मामले ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और इसे “गंभीर प्रशासनिक लापरवाही” करार दिया।
अपर आयुक्त को हटाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के अपर आयुक्त को तत्काल पद से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें चूक सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ है।
जहरीले पानी से गई कई जानें
पिछले दिनों इंदौर के कुछ इलाकों में नलों से दूषित पानी की आपूर्ति के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े थे। इनमें से कई लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में पानी में हानिकारक तत्व पाए गए, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।
सरकार से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जनता में रोष, प्रशासन पर सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका नतीजा निर्दोष लोगों की जान जाने के रूप में सामने आया।
यह मामला न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में शहरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरा है। अब देखना होगा कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों पर कितनी गंभीरता से अमल करती है।